मशहूर पहलवान विनेश फोगाट ने मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी के लिए पारदर्शी नियमों की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और कुश्ती महासंघ (WFI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- विनेश फोगाट ने मातृत्व के बाद खेल में वापसी के लिए स्पष्ट नीति की मांग की है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, WFI और भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी किया है।
- याचिका में चयन प्रक्रिया में महिला एथलीटों को मिलने वाले नुकसान को दूर करने की मांग की गई है।
- अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय कुश्ती पहलवान विनेश फोगाट की उस याचिका पर महत्वपूर्ण रुख अपनाया है, जिसमें मातृत्व अवकाश के बाद महिला एथलीटों की खेल में वापसी के लिए एक समावेशी और पारदर्शी प्रणाली की मांग की गई है। न्यायमूर्ति स्वराना कांता शर्मा ने इस मामले में केंद्र सरकार, कुश्ती महासंघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
विनेश फोगाट की याचिका का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी 'रिटर्न-टू-कॉम्पिटिशन' नीति बनाना है, जो महिला एथलीटों को मातृत्व के कारण खेल से दूर रहने पर किसी भी प्रकार के चयन संबंधी नुकसान से बचा सके। वर्तमान में, एथलीटों को उन प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है जिनमें वे गर्भावस्था या मातृत्व अवकाश के कारण भाग नहीं ले सकीं। विनेश ने मांग की है कि चयन और नामांकन के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंड होने चाहिए और उन एथलीटों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने चाहिए जिनकी रैंकिंग गर्भावस्था के कारण प्रभावित हुई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक एथलीट का नहीं, बल्कि वैश्विक खेल संस्कृति में महिला सशक्तिकरण और नीतिगत सुधार का एक बड़ा प्रश्न है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, मातृत्व अवकाश लेने वाली महिला एथलीटों को उनकी रैंकिंग और खेल में वापसी के लिए विशेष सुरक्षा और लाभ दिए जाते हैं। भारत में इस तरह की नीति का अभाव महिला एथलीटों के करियर को समय से पहले समाप्त कर सकता है।
"यह महिला एथलीटों और मातृत्व अवकाश के प्रभाव पर एक व्यापक प्रश्न है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, मातृत्व अवकाश लेने वाली एथलीटों को उनकी रैंकिंग की सुरक्षा और अन्य लाभ दिए जाते हैं।" - वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव।
विनेश फोगाट ने जुलाई 2025 में अपने बेटे को जन्म दिया था और तब से वह कुश्ती में वापसी के लिए संघर्ष कर रही हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि मौजूदा पात्रता प्रणाली उन प्रदर्शनों पर अत्यधिक जोर देती है जो उनकी अनुपलब्धता के दौरान हुए थे। इसके अतिरिक्त, विनेश ने घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए एक निश्चित और समयबद्ध कैलेंडर की भी मांग की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारतीय खेलों में महिला एथलीटों को मातृत्व के बाद अक्सर चयन प्रक्रियाओं में संघर्ष करना पड़ता है। वैश्विक स्तर पर, कई खेल संघ अब 'मैटरनिटी प्रोटेक्शन' नीतियों को अपना रहे हैं ताकि एथलीटों को जैविक परिवर्तनों के कारण करियर खोने का डर न रहे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विनेश फोगाट की याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: याचिका का उद्देश्य मातृत्व के बाद महिला एथलीटों के लिए एक पारदर्शी चयन नीति सुनिश्चित करना है ताकि उन्हें खेल से ब्रेक लेने के कारण नुकसान न हो।
प्रश्न 2: अदालत ने किन संस्थाओं को नोटिस जारी किया है?
उत्तर: अदालत ने केंद्र सरकार, कुश्ती महासंघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को नोटिस जारी किया है।