भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ा झटका है, ग्रीको-रोमन पहलवान दीपक को डोपिंग टेस्ट में विफल होने के बाद एशियन गेम्स टीम से हटा दिया गया है। वह इस प्रतियोगिता से पहले डोपिंग के कारण बाहर होने वाले तीसरे भारतीय पहलवान बन गए हैं।
- ग्रीको-रोमन पहलवान दीपक को डोपिंग के प्रतिकूल परिणामों के कारण एशियन गेम्स टीम से हटाया गया।
- जांच में 'क्लोमीफेन' (Clomifene) नामक प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया।
- मुकुल दहिया और दीपांशु के बाद दीपक एशियन गेम्स से बाहर होने वाले तीसरे पहलवान बने।
- WFI ने UWW द्वारा लगाए जाने वाले भारी जुर्माने से बचने के लिए यह कदम उठाया।
एशियन गेम्स की तैयारियों के बीच भारतीय कुश्ती को एक और बड़ा झटका लगा है। ग्रीको-रोमन पहलवान दीपक को राष्ट्रीय दल से बाहर कर दिया गया है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 को लखनऊ में हुए चयन ट्रायल के दौरान दीपक के मूत्र नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया है।
25 वर्षीय दिल्ली के पहलवान दीपक, जो भारतीय डाक सेवा में कार्यरत हैं, पिछले कुछ महीनों में अपनी शानदार फॉर्म के कारण चर्चा में थे। वह डाक विभाग की ओर से एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले पहलवान बने थे। फेडरेशन कप में पदक जीतने के बाद उन्होंने लखनऊ ट्रायल में सबको चौंकाते हुए अपनी जगह बनाई थी, लेकिन अब उनका यह सफर विवादों में घिर गया है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना उन एथलीटों की निगरानी में गंभीर कमी को दर्शाती है जो राष्ट्रीय शिविरों (National Camps) के बजाय सीधे ट्रायल के माध्यम से टीम में आते हैं। चूंकि दीपक राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा नहीं थे, इसलिए उनकी नियमित जांच नहीं हो सकी। यह पैटर्न संकेत देता है कि चयन प्रक्रिया में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि डोपिंग नियंत्रण को भी प्राथमिकता देनी होगी।
प्रमुख प्रतियोगिताओं से पहले भारतीय पहलवानों का बार-बार डोप टेस्ट में फेल होना सप्लीमेंट्स की शुद्धता और प्रतिबंधित दवाओं के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करता है।
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) ने जोखिम न लेते हुए दीपक को तुरंत टीम से हटाने का निर्णय लिया। संघ के अधिकारियों का कहना है कि यदि दीपक एशियन गेम्स के दौरान पॉजिटिव पाए जाते, तो विश्व कुश्ती निकाय UWW संघ पर 20 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगा सकता था।
NADA के नोटिस के मुताबिक, दीपक ने डोपिंग कंट्रोल फॉर्म में किसी भी प्रतिबंधित दवा के सेवन का उल्लेख नहीं किया था। साथ ही, वह उन आहार सप्लीमेंट्स (Dietary Supplements) के बिल या रसीदें पेश करने में भी विफल रहे, जिनका उन्होंने दावा किया था। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि दीपक के पास क्लोमीफेन के उपयोग के लिए कोई Therapeutic Use Exemption (TUE) नहीं था।
| पहलवान | श्रेणी | हटाए जाने का कारण |
|---|---|---|
| दीपक | ग्रीको-रोमन | क्लोमीफेन (हार्मोन मॉड्यूलेटर) |
| मुकुल दहिया | पुरुष फ्रीस्टाइल 86 किग्रा | डोपिंग उल्लंघन |
| दीपांशु | ग्रीको-रोमन 130 किग्रा | डोपिंग उल्लंघन |
हालांकि दीपक को अभी तक औपचारिक रूप से निलंबित नहीं किया गया है, लेकिन यदि B-सैंपल की जांच में भी प्रतिबंधित पदार्थ पाया जाता है, तो 31 मई 2026 के बाद के उनके सभी परिणामों को रद्द किया जा सकता है। दीपक के पास B-सैंपल की जांच का अनुरोध करने के लिए सात दिनों का समय है।
प्रश्न 1: दीपक को टीम से क्यों हटाया गया जबकि उन्हें अभी निलंबित नहीं किया गया है?
WFI ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि यदि वह एशियन गेम्स के दौरान पॉजिटिव पाए जाएं, तो संघ को UWW द्वारा 20 लाख रुपये का जुर्माना न भरना पड़े।
प्रश्न 2: अब खिलाड़ी के पास क्या विकल्प है?
दीपक सात दिनों के भीतर अपने B-सैंपल की जांच की मांग कर सकते हैं ताकि यह साबित हो सके कि पहली रिपोर्ट गलत थी।