एशियाई खेलों की तैयारियों के बीच भारत को बड़ा झटका लगा है। तीन पहलवानों सहित एक दर्जन से अधिक एथलीट डोपिंग मामलों में फंस गए हैं, जिससे पदक की उम्मीदों को गहरा धक्का लगा है।

  • दीपक, दीपांशु और मुकुल दहिया सहित तीन पहलवान डोपिंग के कारण निलंबित।
  • भारत लगातार तीन वर्षों से WADA की प्रतिकूल निष्कर्षों (adverse findings) की वैश्विक सूची में शीर्ष पर है।
  • WADA ने चेतावनी दी है कि डोपिंग की समस्या 2036 ओलंपिक की मेजबानी के दावे को खतरे में डाल सकती है।

एशियाई खेलों में केवल 10 दिन शेष रहते हुए, भारतीय दल को एक और बड़ा झटका लगा है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने ग्रीको-रोमन पहलवान दीपक (67 किग्रा वर्ग) को प्रतिबंधित पदार्थ के सकारात्मक परीक्षण के बाद अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। दीपक का नमूना 31 मई को लखनऊ में एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के दौरान लिया गया था।

दीपक इस संकट में फंसने वाले तीसरे पहलवान हैं। उनसे पहले ग्रीको-रोमन पहलवान दीपांशु (130 किग्रा) और फ्रीस्टाइल प्रतियोगी मुकुल दहिया (86 किग्रा) को निलंबित किया जा चुका है। इसका परिणाम यह होगा कि भारत अब आइची-नागोया खेलों की तीन कुश्ती श्रेणियों में पूरी तरह से अनुपस्थित रहेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कुछ व्यक्तिगत गलतियां नहीं हैं, बल्कि भारतीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र की एक प्रणालीगत विफलता है। डोपिंग का यह साया कुश्ती से आगे बढ़कर भारोत्तोलन, जूडो, एथलेटिक्स, शूटिंग, रोइंग और वुशू तक फैल गया है। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान चार भारोत्तोलकों और दो जूडो खिलाड़ियों का बाहर होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं (PED) का उपयोग एक गंभीर समस्या बन चुका है।

"कुलीन एथलीटों के बीच प्रतिबंधित पदार्थों का बढ़ता प्रचलन शॉर्टकट की एक खतरनाक संस्कृति को दर्शाता है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय खेलों की अखंडता को खतरे में डालता है।"

चिंता की बात यह है कि अब नाबालिग खिलाड़ी भी इसमें फंस रहे हैं। हाल ही में एक 17 वर्षीय तैराक को टर्बुटालिन (एक प्रतिबंधित बीटा-2 एगोनिस्ट) के सकारात्मक परीक्षण के बाद 18 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। यह दर्शाता है कि डोपिंग की समस्या अब युवा स्तर तक पहुंच चुकी है।

विश्व स्तर पर भारत की स्थिति चिंताजनक है। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत में 260 प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज किए गए। यह लगातार तीसरा साल है जब भारत वैश्विक सूची में शीर्ष पर रहा है। WADA अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने सीबीआई के साथ बैठकें की हैं ताकि उन एजेंटों और रैकेटियर्स के नेटवर्क को खत्म किया जा सके जो एथलीटों को ड्रग्स सप्लाई करते हैं।

खेल प्रभावित एथलीट/मामले स्थिति
कुश्ती 3 (दीपक, दीपांशु, मुकुल) निलंबित
भारोत्तोलन 4 एथलीट CWG से बाहर
एथलेटिक्स अभिषेक पाल दस्ते से बाहर
तैराकी 1 नाबालिग एथलीट 18 महीने का प्रतिबंध

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर भारत की 2036 ओलंपिक की मेजबानी की महत्वाकांक्षा पर पड़ सकता है। विटोल्ड बांका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि WADA के नियमों का पालन किए बिना विश्व चैंपियनशिप या ओलंपिक की मेजबानी करना संभव नहीं होगा। अब पूरी दुनिया यह देख रही है कि क्या भारत एक 'क्लीन' स्पोर्टिंग नेशन बन पाएगा या नहीं।

क्या आप जानते हैं?: भारत लगातार तीन वर्षों से WADA की प्रतिकूल विश्लेषण निष्कर्षों की सूची में पहले स्थान पर रहा है, जिससे यह डोपिंग के मामले में दुनिया के सबसे अधिक निगरानी वाले देशों में से एक बन गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: एशियाई खेलों से पहले किन पहलवानों को निलंबित किया गया?
दीपक, दीपांशु और मुकुल दहिया को प्रतिबंधित पदार्थों के सकारात्मक परीक्षण के बाद निलंबित किया गया है।

प्रश्न 2: यह भारत की 2036 ओलंपिक बोली को कैसे प्रभावित करता है?
WADA के अनुसार, यदि भारत डोपिंग रोधी नियमों का कड़ाई से पालन नहीं करता है, तो उसे ओलंपिक की मेजबानी मिलना मुश्किल हो सकता है।