भारतीय पिस्तौल शूटर राही सरनोबात ने तीन साल के गंभीर न्यूरोपैथिक दर्द से उबरकर एशियाई खेलों के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। 35 की उम्र में, उन्होंने अपनी तकनीक और मानसिक दृष्टिकोण को बदलकर एक प्रेरणादायक वापसी की है।
- राही सरनोबात ने तीन साल तक न्यूरोपैथिक दर्द (नसों का दर्द) का सामना किया, जिससे वे बिस्तर पर रहने को मजबूर थीं।
- 35 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपनी तकनीक, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक संकेतों को सुनने के तरीके में बदलाव किया है।
- उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कड़े मुकाबले के बाद एशियाई खेलों के लिए टीम में वापसी सुनिश्चित की है।
भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में शीर्ष स्तर पर पहुँचना कठिन है, लेकिन उस स्तर पर वापस आना उससे भी कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। राही सरनोबात के लिए यह संघर्ष केवल खेल के बारे में नहीं था, बल्कि अपने शरीर के साथ युद्ध लड़ने के बारे में था। साल 2022 में, महाराष्ट्र की इस दिग्गज शूटर को 'न्यूरोपैथिक दर्द' नामक एक ऐसी बीमारी ने घेर लिया था, जिसका कोई निश्चित उपचार मार्ग नहीं था। यह दर्द इतना गंभीर था कि वे लंबे समय तक बिस्तर से उठने में भी असमर्थ थीं।
वर्ष 2025 तक, राही पूरी तरह से दवाओं के प्रभाव से मुक्त हो चुकी हैं। लेकिन उनकी वापसी पहले जैसी नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया है कि अब उनकी तकनीक, उनका शरीर और उनका सोचने का तरीका बदल चुका है। अब उनकी प्राथमिकता प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने शरीर के संकेतों को सुनना भी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, राही सरनोबात की कहानी केवल एक एथलीट की वापसी नहीं है, बल्कि यह खेल जगत में 'मेंटल वेलनेस' और 'न्यूरोप्लास्टिसिटी' के महत्व को रेखांकित करती है। प्रतिस्पर्धी एथलीट अक्सर अत्यधिक तनाव के कारण अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो अंततः गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।
"अब मेरी प्राथमिकता अपने शरीर की बात सुनना है। हम अक्सर प्रदर्शन के दबाव में इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर भारी पड़ता है," - राही सरनोबात
राही के लिए सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक सहनशक्ति (stamina) को फिर से हासिल करना था। वापसी के शुरुआती दौर में, वे केवल एक मिनट तक निशाना साध पाती थीं। उन्हें उस स्तर तक पहुँचने में लगभग 14 महीने लगे जहाँ वे लगातार 5 से 6 घंटे तक अभ्यास कर सकें। उनकी इस यात्रा में उनके न्यूरोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और कोच जलेना अरुनोविच की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
एशियाई खेलों की ओर बढ़ते हुए, राही को युवा निशानेबाजों से कड़ी चुनौती मिल रही है। हालांकि, देहरादून में राष्ट्रीय शूटिंग कैंप के दौरान उन्होंने अपनी निरंतरता और अनुशासन से साबित कर दिया कि अनुभव और मानसिक मजबूती का कोई विकल्प नहीं है। टी4 ट्रायल्स में जीत के साथ, उन्होंने एशा सिंह और मनु भाकर जैसे दिग्गजों के बीच अपनी जगह मजबूत कर ली है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: राही सरनोबात को किस बीमारी ने प्रभावित किया था?
उत्तर: उन्हें 'न्यूरोपैथिक दर्द' (Neuropathic pain) की समस्या थी, जो नसों से संबंधित एक गंभीर दर्द है।
प्रश्न 2: राही की वापसी का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: उनकी वापसी का आधार शारीरिक सहनशक्ति को धीरे-धीरे बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य व शरीर के संकेतों पर ध्यान केंद्रित करना है।