केरल सरकार ने छात्र सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'सिद्धार्थन एंटी-रैगिंग और छात्र कल्याण अधिनियम' का मसौदा तैयार करने हेतु एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह कदम वायनाड में जे.एस. सिद्धार्थन की दुखद मृत्यु के बाद उठाया गया है।

मुख्य बातें

  • 'सिद्धार्थन एंटी-रैगिंग और छात्र कल्याण अधिनियम' के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन।
  • अच्युतशंकर एस. नायर समिति की अध्यक्षता करेंगे।
  • छात्रों के लिए एक विशेष 'डिस्ट्रैस ऐप' (Distress App) विकसित किया जाएगा।
  • मानसिक स्वास्थ्य सहायता और आपातकालीन डिजिटल रिपोर्टिंग पर जोर।

तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग की घटनाओं को रोकने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गृह विभाग ने 'सिद्धार्थन एंटी-रैगिंग और छात्र कल्याण अधिनियम' और 'सिद्धार्थन छात्र संकट ऐप' (Sidharthan Student Distress App) का मसौदा तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

इस समिति की अध्यक्षता केरल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष अच्युतशंकर एस. नायर करेंगे। समिति का मुख्य कार्य विशेषज्ञों की राय जुटाना और एक ऐसा व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना है, जो स्कूलों और कॉलेजों में आपातकालीन डिजिटल रिपोर्टिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सख्त सुरक्षा दिशानिर्देशों को संस्थागत बना सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कानून केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त असुरक्षा की भावना को खत्म करने का एक प्रयास है। 2024 में वायनाड के एक पशु चिकित्सा छात्र, जे.एस. सिद्धार्थन की संदिग्ध मृत्यु ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था, जिसके बाद से छात्र सुरक्षा को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

यह कानून शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही तय करने और छात्रों को एक सुरक्षित डिजिटल सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

समिति में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिन्हाज आलम को संयोजक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून और सामाजिक न्याय विभागों के वरिष्ठ सचिवों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञ और पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल में रैगिंग विरोधी कानून 27 साल पहले लागू किया गया था, लेकिन नियमों के अभाव में कानून प्रवर्तन एजेंसियां प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही थीं। केरल उच्च न्यायालय ने भी इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि पुराने कानूनों के बावजूद छात्र सुरक्षा के लिए आवश्यक नियम नहीं बनाए गए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. सिद्धार्थन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य रैगिंग को रोकना, छात्रों के लिए डिजिटल रिपोर्टिंग तंत्र बनाना और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करना है।

2. इस समिति का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता केरल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष अच्युतशंकर एस. नायर कर रहे हैं।