इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलाकणी फंडामेंटम के तीसरे फंड के लॉन्च के साथ अपना सामान्य भागीदार (GP) पद छोड़ रहे हैं। वह अब भी फंड के प्रमुख निवेशक और सलाहकार रहेंगे, जबकि फंड का लक्ष्य 200 मिलियन डॉलर जुटाना है, विशेष रूप से एआई और फिनटेक स्टार्टअप्स के लिए।

इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी नेता नंदन नीलाकणी ने फंडामेंटम पार्टनरशिप में अपने सामान्य भागीदार (GP) के पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि वे फंड के प्रमुख निवेशक और मार्गदर्शक बने रहेंगे। फंडामेंटम के तीसरे फंड का लक्ष्य 200 मिलियन डॉलर जुटाना है, जिसे एआई, फिनटेक और उपभोक्ता प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स पर केंद्रित किया जाएगा।

फंडामेंटम और नीलाकणी का पथ

2017 में नीलाकणी और सन्जीव अग्रवाल ने फंडामेंटम की स्थापना की, जो भारतीय स्टार्टअप्स को सीरीज बी और आगे के चरणों में निवेश करता है। 2024 तक, फर्म ने 17 कंपनियों में निवेश किया है, जिनमें स्पिननी, फार्मईज़ी और कुकु एफएम जैसे नाम शामिल हैं। नीलाकणी ने अब तक फंड को “बड़ी प्रतिबद्धता” देने का वादा किया है, हालांकि राशि सार्वजनिक नहीं की गई।

भारत में वेंचर कैपिटल का बदलता परिदृश्य

संजेव अग्रवाल ने बताया कि पहले भारत में वेंचर फंडिंग पूरी तरह से अमेरिकी निवेशकों पर निर्भर थी, परन्तु आज घरेलू निवेशकों की भूमिका बढ़ गई है। फंड III का आधा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से और शेष घरेलू संस्थानों, फाउंडर और परिवारिक कार्यालयों से जुटाने की योजना है। यह बदलाव भारतीय वेंचर पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।

एआई का भारतीय दृष्टिकोण

फंडामेंटम का मानना है कि भारत में एआई का सबसे बड़ा अवसर उन अनुप्रयोगों में है जो वैश्विक मॉडलों पर आधारित हैं, विशेषकर वित्तीय सेवाएँ, कंटेंट और भाषा आधारित उपभोक्ता ऐप्स। यह दृष्टिकोण अमेरिकी और चीनी मॉडल से अलग है, जहाँ प्रमुख निवेश मॉडल विकास पर केंद्रित है।

नेतृत्व में बदलाव और भविष्य की दिशा

अशिश कुमार के प्रस्थान के बाद, फंडामेंटम ने प्रैतिक जैन, मयंक कछवाहा और संजय चतुर्वेदी को नए GP के रूप में शामिल किया। नीलाकणी का फंड III में सक्रिय मार्गदर्शन स्टार्टअप्स को रणनीतिक सहायता और नेटवर्किंग अवसर प्रदान करेगा। फंड की पहली बंदी अभी तक घोषित नहीं हुई है, परन्तु निवेशक फंड को अगले 12 से 18 महीनों में पूरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।