डायरेक्टर ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) ने कैलानी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सक्रिय निर्देशक धरेमेश संगानी के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बड़े पैमाने पर छापेमार किया। जांच में निर्यात आय के गैर‑प्रकाशन, विदेशी बैंक खातों की छुपी हुई मौजूदगी और यूएई में अनडिस्क्लोज़्ड व्यवसायिक इकाई के संकेत मिले।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ED ने कैलानी इम्पेक्स पर फ़ॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के तहत छापा लगाया
- डायरेक्टर धरेमेश संगानी पर निर्यात आय को छुपाने और विदेशी खातों की अनदेखी का आरोप
- संयुक्त राज्य अमेरिका और यूके कस्टम्स द्वारा भी सम्बंधित लेन‑देनों की जांच जारी
मुंबई – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कैलानी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सक्रिय निदेशक धरेमेश नरेंद्र संगानी के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) के प्रावधानों के तहत विस्तृत खोज कार्रवाई की। यह कार्रवाई उन संभावित वित्तीय उल्लंघनों की जाँच में की गई, जिसमें निर्यात आय को भारत में लाने में देरी और अनधिकृत विदेशी खातों का संचालन शामिल है।
पृष्ठभूमि एवं प्रमुख तथ्य
धरेमेश संगानी, जो एक फिल्म निर्माता और शेखर सुमन फिल्म अकादमी के सह-संस्थापक के रूप में भी जाने जाते हैं, पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कुछ विदेशी खरीदारों से प्राप्त निर्यात आय को भारत में नहीं लाया। रिपोर्ट में कहा गया कि इन निर्यात आय को न तो उचित समय सीमा में रिवर्स किया गया और न ही अधिकृत डीलर बैंक से समय विस्तार प्राप्त किया गया। साथ ही, निर्यात चालानों में उल्लेखित खरीदार या कन्शीगी के अलावा तीसरे पक्ष की संस्थाओं से प्राप्त आय भी छुपाई गई।
अपराधिक संकेत एवं विदेशी संपत्तियों की खोज
जांच के दौरान, ED को कई ऐसे प्रमाण मिले जिनमें अनडिस्क्लोज़्ड विदेशी संपत्तियों, विदेशी बैंक खातों और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक अज्ञात व्यावसायिक इकाई का उल्लेख था। इन खातों और लेन‑देनों को प्राधिकृत अधिकारियों को नहीं बताया गया था, जिससे संभावित आर्थिक धोखाधड़ी और धन शोधन के गंभीर संकेत मिलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय जांच का विस्तार
संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की कस्टम्स विभाग भी धरेमेश संगानी के कुछ लेन‑देनों की जांच कर रहे हैं, और ED इन विदेशी जांचों के साथ मिलकर FEMA उल्लंघनों को प्रमाणित करने की कोशिश कर रहा है। इस समय, विस्तृत जांच जारी है और आगे के कानूनी कदमों की प्रतीक्षा है।
संभावित प्रभाव और भविष्य की दिशा
यदि इस जांच में ठोस सबूत सामने आते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत रूप से धरेमेश संगानी को बल्कि भारतीय निर्यातकों और फिल्म उद्योग में जुड़े कई व्यवसायों को भी प्रभावित कर सकता है। इस प्रकार के मामलों में नियामक संस्थाएँ विदेशी मुद्रा लेन‑देनों पर कड़ी निगरानी रखती हैं, जिससे भविष्य में समान उल्लंघनों को रोकने के लिए कड़े नियम लागू हो सकते हैं।