माइक्रोसॉफ्ट ने Xbox विभाग में 3,200 नौकरियों की छंटनी की, जिससे H‑1B वीज़ा कार्यक्रम को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई। भारतीय मूल की एशा शर्मा की नियुक्ति को कुछ अमेरिकी राजनेता विदेशी श्रम को प्राथमिकता देने का आरोप लगा रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- माइक्रोसॉफ्ट ने Xbox में 3,200 नौकरियों की छंटनी की।
- हिंसा‑विरोधी समूह और रिपब्लिकन नेता H‑1B वीज़ा को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
- एशा शर्मा, भारतीय मूल की नई CEO, इस विवाद के केंद्र में हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने 10 जुलाई, 2026 को विश्व स्तर पर लगभग 4,800 पदों की छंटनी की घोषणा की, जिसमें Xbox गेमिंग विभाग के 3,200 कर्मचारियों को हटाया गया। यह कदम कंपनी के लगातार घाटे और निवेश पर कम रिटर्न को देखते हुए लाभप्रदता सुधारने के व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है।
H‑1B वीज़ा कार्यक्रम का पृष्ठभूमि
अमेरिका का H‑1B कार्यक्रम पहले से ही राजनीतिक प्रतिरोध का शिकार रहा है, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में किए गए कड़े जाँच के बाद। भारत से आवेदकों का प्रतिशत 70 % से अधिक है, जिससे माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े टेक कंपनियों को प्रत्येक वर्ष हजारों भारतीय पेशेवरों को काम पर रखने की सुविधा मिलती है।
एशा शर्मा और Xbox का पुनर्गठन
फरवरी 2026 में Xbox की CEO नियुक्त हुई एशा शर्मा, भारतीय मूल की पहली महिला CEO हैं। उनका मानना है कि छंटनी से विभाग की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और भविष्य में अधिक स्थायी विकास हो सकेगा। एक आंतरिक मेमो के अनुसार, चार प्रमुख गेमिंग स्टूडियो को बेचा जाएगा, जबकि शेष इकाइयों को नई रणनीतिक दिशा में ले जाया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सार्वजनिक बहस
वेस्ट वर्जीनिया के रिपब्लिकन प्रतिनिधि रिले मोर ने इस छंटनी को H‑1B वीज़ा को निरस्त करने का अवसर बताया। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ को कहा, “बड़ी टेक कंपनियां इस कार्यक्रम का दुरुपयोग कर अमेरिकी नौकरियों को कम लागत वाले विदेशी श्रम से बदल रही हैं।” सोशल मीडिया पर भी कई उपयोगकर्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि Xbox भारतीय मूल की CEO के कारण अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर “सस्ते विदेशी श्रम” लाया जा रहा है।
संभावित प्रभाव और आगे की दिशा
यदि इस विवाद को सॉलिड नीति बदलाव के रूप में नहीं देखा गया, तो यह अमेरिकी टेक उद्योग में श्रमिक‑आधारित वैधता के प्रश्न को और गहरा कर सकता है। साथ ही, माइक्रोसॉफ्ट को अपने H‑1B आवेदनों की संख्या को लेकर कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भविष्य में विदेशी प्रतिभा की भर्ती में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
इस स्थिति को देखते हुए, नीति निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों को एक संतुलित समाधान खोजने की आवश्यकता है, जो अमेरिकी रोजगार को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करे।