केरल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने नई मिर्च, ब्रह्मी, वेटिवर, अदरक और हल्दी की किस्में घोषित कीं, जो उच्च उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की आय में वृद्धि का वादा करती हैं। इन किस्मों को राज्य के बीज उपसमिति द्वारा मंजूरी मिली है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नई किस्में उच्च उपज देती हैं
  • किसानों की आय में सुधार
  • राज्य की कृषि उत्पादन में वृद्धि

केरल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (केएयू) ने राज्य के विशिष्ट कृषि‑जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप पाँच नई उच्च‑उपज फसल किस्में जारी कीं। ये किस्में 29वीं केरल राज्य बीज उपसमिति की मंजूरी के बाद आधिकारिक रूप से किसानों के लिए उपलब्ध करायीं गईं।

नई किस्मों की विशेषताएँ

केएयू तेजस्विनी (मिर्च) – शरदा एस. द्वारा विकसित, यह लंबी फल वाली, उच्च‑उपज वाली मिर्च है, जो लगभग 32.5 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है। यह मध्यम तीखापन, वायरस रोग और बैक्टीरियल विल्ट के प्रति सहनशीलता रखती है, तथा बाजार में अच्छी स्वीकृति पाती है।

केएयू मेडह (ब्रह्मी) – अंसी जोसेफ की टीम ने तैयार किया, यह मध्य केरल के लिए उपयुक्त है और 34‑36 टन ताज़ा हर्बेज तथा 5‑6 टन सूखा उत्पादन प्रति हेक्टेयर देती है। इसमें बकोसाइड सामग्री अधिक है, जो औषधीय मूल्य को बढ़ाता है।

केएयू सौगंधिका (वेटिवर) – डॉ. जोसेफ ने 1.4% आवश्यक तेल वाले इस वेटिवर को विकसित किया। यह तेज़ वृद्धि, अधिक जड़ उत्पादन (6.1‑7.8 टन सूखी जड़) और देर से फूलने की विशेषता रखता है, जिससे तेल उद्योग को लाभ होगा।

केएयू कोचीन प्राइड (अदरक) – नायर सुनील अप्पुक्तन द्वारा विकसित, यह अदरक पारंपरिक कोचीन अदरक की तीखापन और सुगंध को बरकरार रखता है, परंतु ज़िंगिबेरिन और स्टार्च की मात्रा अधिक है। 36.3 टन प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन के साथ यह कोच्चि और इडुकी में प्रमुख रूप से उगाया जाएगा।

केएयू गोल्डन फिंगर (हल्दी) – डॉ. अप्पुक्तन की यह हल्दी किस्म 8.65% कर्क्यूमिन सामग्री और 39‑42 टन ताज़ा हल्दी प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है। गहरा नारंगी रंग और निर्यात‑योग्य जड़ें इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाती हैं।

आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव

इन नई किस्मों का परिचय केरल के किसानों को उच्च आय, कम रोग‑प्रतिरोधी नुकसान और बेहतर बाजार मूल्य प्रदान करेगा। राज्य की कुल कृषि उत्पादन क्षमता में अनुमानित 5‑7% की बढ़ोतरी की संभावना है, जो खाद्य सुरक्षा एवं निर्यात में सकारात्मक योगदान देगी।