केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन पर बल दिया है। उन्होंने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की महत्ता को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

  • EV क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
  • लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आत्मनिर्भरता का लक्ष्य।
  • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के लिए ₹34,000 करोड़ का परिव्यय।
  • TGSRTC के बेड़े में दिसंबर तक 800 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी।

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रविवार को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और संबद्ध क्षेत्रों में स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर होना चाहिए।

यह कार्यक्रम KETO Motors की नई वाणिज्यिक बस के अनावरण के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस अवसर पर तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (TGSRTC) के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वाई. नागी रेड्डी भी उपस्थित थे। मंत्री रेड्डी ने चेतावनी दी कि चीन जैसे देशों से आयात पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है, जैसा कि पूर्व में आपूर्ति बाधित होने के दौरान देखा गया था।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों पर भी टिकी है। इन खनिजों की कमी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता पैदा कर सकती है। सरकार द्वारा घोषित ₹34,000 करोड़ का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन इस दिशा में एक रणनीतिक कदम है जो रक्षा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे भविष्य के उद्योगों को मजबूती प्रदान करेगा।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी केवल पेट्रोल-डीजल का विकल्प नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता का मार्ग है।

मंत्री ने आगे कहा कि भारत सरकार विदेशों में खनन ब्लॉकों का अधिग्रहण कर रही है ताकि इन रणनीतिक संसाधनों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वहीं, TGSRTC के अधिकारियों ने बताया कि PM eDrive योजना के तहत सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें बेड़े में शामिल की जा रही हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने भारत को अपनी खनिज नीति को पुनर्गठित करने के लिए मजबूर किया है, जिससे अब 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत घरेलू खनन और वैश्विक अधिग्रहण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: लिथियम को 'सफेद सोना' कहा जाता है क्योंकि यह आधुनिक बैटरी तकनीक का आधार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिज कौन से हैं?
उत्तर: लिथियम, कोबाल्ट, निकल और तांबा जैसे खनिज जो EV और सौर ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 2: राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य खनिजों की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा करना है।