दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी नीट विरोध प्रदर्शन के बीच नोएडा पुलिस ने भ्रामक और उत्तेजक सामग्री फैलाने के आरोप में तीन सोशल मीडिया खातों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं।

मुख्य बातें

  • नोएडा पुलिस ने भ्रामक जानकारी फैलाने वाले तीन सोशल मीडिया खातों के खिलाफ दो FIR दर्ज की हैं।
  • एक वीडियो में नोएडा के सेक्टर 63 और चिल्ला बॉर्डर पर औद्योगिक अशांति का झूठा दावा किया गया था।
  • दूसरे मामले में पुलिस के व्यवहार को लेकर गलत सूचना प्रसारित करने का आरोप है।
  • पुलिस ने जनता से सोशल मीडिया पर किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करने की अपील की है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, नोएडा पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी तेज कर दी है। पुलिस ने कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली भ्रामक और उत्तेजक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में तीन अलग-अलग सोशल मीडिया खातों के खिलाफ दो एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं।

पहला मामला: औद्योगिक अशांति का झूठा दावा

पहली एफआईआर 22 जुलाई, 2026 को इंस्टाग्राम अकाउंट 'jantar_mantar__live_24' द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो से संबंधित है। पुलिस जांच में पाया गया कि इस वीडियो में दावा किया गया था कि नोएडा के सेक्टर 63 और चिल्ला बॉर्डर पर हजारों मजदूर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और यातायात बुरी तरह बाधित है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि ये दावे पूरी तरह से निराधार और असत्य थे, जिनका उद्देश्य जनता में डर पैदा करना और प्रशासन के प्रति अविश्वास फैलाना था।

दूसरा मामला: पुलिस व्यवहार पर गलत सूचना

दूसरी एफआईआर 23 जुलाई को इंस्टाग्राम अकाउंट 'charchajunctionnews' और एक्स (X) हैंडल '@TruthfulCriticI' द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के संबंध में है। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि नोएडा पुलिस ने आम जनता के साथ दुर्व्यवहार किया है। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि वीडियो और उसके साथ किए गए दावे भ्रामक थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन पोस्ट्स में UN Human Rights Council (UNHRC) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी टैग किया गया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, डिजिटल युग में गलत सूचना (Misinformation) का प्रसार न केवल सामाजिक शांति को भंग कर सकता है, बल्कि बड़े पैमाने पर नागरिक अशांति भी पैदा कर सकता है। नोएडा पुलिस की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि प्रशासन अब 'डिजिटल अफवाहों' को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है।

सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के जानकारी साझा करना अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक कानूनी अपराध बनता जा रहा है।
क्या आप जानते हैं?: साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके भ्रामक वीडियो की पहचान करने के लिए कर रही है।

Frequently Asked Questions

1. नोएडा पुलिस ने किन खातों पर कार्रवाई की है?
पुलिस ने 'jantar_mantar__live_24', 'charchajunctionnews' और '@TruthfulCriticI' के खिलाफ कार्रवाई की है।

2. भ्रामक पोस्ट फैलाने पर क्या सजा हो सकती है?
आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।