वसंत कुंज की एक 75 वर्षीय महिला, जिसे डिजिटल अरेस्ट के जरिए लाखों की चपत लगाई गई, ने अब CBI जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इस मामले पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य बातें
- 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट के जरिए घर, सोना और नकदी लूटी गई।
- पीड़ित ने दिल्ली पुलिस की सुस्ती का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस और CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा है कि बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले डिजिटल अरेस्ट अपराध सबसे गंभीर हैं।
दिल्ली के वसंत कुंज की रहने वाली विभा (परिवर्तित नाम), जो कैंसर सर्वाइवर भी हैं, ने एक भयावह डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार होने के बाद न्याय के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। जालसाजों ने उन्हें डरा-धमकाकर उनका घर बेचने, सोना गिरवी रखने और लगभग ₹3 लाख की नकदी देने पर मजबूर किया। पीड़िता का आरोप है कि अप्रैल में FIR दर्ज होने के बाद से दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं की है।
30 जुलाई को पीड़िता और उनकी बेटी सीमा चौहान ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की, जिसमें मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। अदालत ने इस मामले में पुलिस और CBI को नोटिस जारी करते हुए उनका जवाब मांगा है। साथ ही, अदालत ने पुलिस को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, और अगली सुनवाई 13 अगस्त के लिए निर्धारित की है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिक्रिया समय पर भी सवाल उठाता है। जालसाजों ने न केवल डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया, बल्कि शारीरिक रूप से भी पीड़िता को प्रताड़ित किया। याचिकाकर्ता के वकील कुश शर्मा के अनुसार, यह मामला डिजिटल और शारीरिक जबरन वसूली का एक खतरनाक मिश्रण है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम लोगों के खिलाफ, विशेष रूप से बुजुर्गों के खिलाफ सबसे खराब प्रकार के अपराध हैं।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतः संज्ञान मामले में निर्देश दिया था कि वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच के लिए CBI को प्राथमिक एजेंसी होना चाहिए। अदालत ने कहा था कि बुजुर्गों की जीवन भर की कमाई को निशाना बनाना समाज के लिए एक गंभीर खतरा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
डिजिटल अरेस्ट की घटना हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जहाँ अपराधी खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल के जरिए 'गिरफ्तारी' के डर में रखते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. डिजिटल अरेस्ट क्या है? यह एक प्रकार का साइबर अपराध है जहाँ अपराधी फर्जी अधिकारी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराते हैं कि वे 'गिरफ्तार' हैं और उन्हें कॉल काटने की अनुमति नहीं देते।
2. क्या पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है? पुलिस के अनुसार, उन्होंने 10-12 बैंक खातों की पहचान की है और खातों के धारकों से पूछताछ की जा रही है।