मध्य प्रदेश ने 'ज्ञान भारतम्' ऐप पर प्राचीन पांडुलिपियों की सबसे बड़ी संख्या दर्ज कर इतिहास रचा। टीकमगढ़ में 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का नक्शा और बुरहानपुर में 220 साल पुराना ग्रंथ इस डिजिटल अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।
भारत सरकार के ज्ञान भारतम् ऐप पर मध्य प्रदेश ने अब तक 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण कर देश में प्रथम स्थान हासिल किया। इस डिजिटल पंजीकरण से न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि शोधकर्ताओं को अनमोल सामग्री तक आसान पहुँच मिल रही है।
डिजिटल अभिलेखागार का विस्तार
ऐप के माध्यम से 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि शेष पन्नों की प्रमाणीकरण प्रक्रिया चल रही है। राज्य के कई जिलों—जैसे टीकमगढ़, पन्ना, बुरहानपुर और दतिया—से दुर्लभ दस्तावेज़ प्राप्त हुए हैं, जो भारतीय इतिहास, भूगोल और साहित्य में नई रोशनी डालते हैं।
टीकमगढ़ में मिला जम्बूद्वीप का नक्शा
टीकमगढ़ के एक पुरातात्विक स्थल से 10 फीट लंबा, हाथ से बना जम्बूद्वीप का नक्शा बरामद हुआ। नक्शे के केंद्र में एक सुन्दर वृत्ताकार संरचना है, जिसके चारों ओर पर्वत शृंखलाएँ और प्राचीन क्षेत्रों की विस्तृत रूपरेखा उकेरी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानचित्र प्राचीन भारतीय भूगोल की समझ को दर्शाता है और वैदिक समय के मानचित्रण पर नई व्याख्याएँ खोल सकता है।
बुरहानपुर में 220‑साल पुराना ग्रंथ
ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में 20 फीट लंबा, हाथ से लिखा ‘श्रीमद्भागवत महापुराण’ ग्रंथ मिला, जिसकी उम्र लगभग 220 वर्ष बताई गई है। इस ग्रंथ को तुरंत सुरक्षित कर डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया, जिससे भविष्य में शोधकर्ता इसे आसानी से अध्ययन कर सकेंगे।
स्थानीय खोजों का राष्ट्रीय महत्व
पन्ना के श्री राम जानकी मंदिर से 1591 ईस्वी की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि ‘रसिक प्रिया’ भी प्राप्त हुई, जिसमें राधा‑कृष्ण प्रेम कथा के माध्यम से काव्यशास्त्र का विश्लेषण किया गया है। दतिया में ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के शासनकाल का ताम्रपत्र भी मिला, जिस पर विक्रम संवत 1828 अंकित है। ये सभी खोजें मध्य प्रदेश को भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा के संरक्षक के रूप में स्थापित करती हैं।
‘ज्ञान भारतम्’ ऐप का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर एक डिजिटल आर्काइव बनाना है, जहाँ कोई भी छात्र या शोधकर्ता शीर्षक, भाषा या विषय के आधार पर सामग्री खोज सकता है। राज्य के मुख्य सचिव ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पास मौजूद प्राचीन दस्तावेज़ों को ऐप पर दर्ज कराएँ, ताकि उन्हें निःशुल्क डिजिटलीकरण और संरक्षण मिल सके।