एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए नवी मुंबई के निवासी से 1.55 करोड़ रुपये ठग लिए। इस मामले में सिम कार्ड तस्करी करने वाले गुजरात के एक युवक को गिरफ्तार किया गया है।
नवी मुंबई में मानवता को झकझोर देने वाली एक साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहाँ जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' नामक तकनीक का इस्तेमाल कर एक स्थानीय निवासी से लगभग 1.55 करोड़ रुपये की भारी राशि ठग ली। इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह की मदद करने के आरोप में गुजरात के वडोदरा से 24 वर्षीय उमंग विजयभाई लाकोड को गिरफ्तार किया गया है।
'डिजिटल अरेस्ट' का खौफनाक तरीका
पुलिस जांच के अनुसार, यह पूरी घटना मार्च 2024 के अंतिम सप्ताह में हुई। जालसाजों ने पीड़ित को व्हाट्सएप और सिग्नल के माध्यम से निशाना बनाया। अपराधियों ने खुद को एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक फर्जी पत्र और गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया, जिससे पीड़ित घबरा गया। अपराधियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को मानसिक रूप से बंधक बना लिया, जिसे पुलिस 'डिजिटल अरेस्ट' कह रही है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर पीड़ित ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए 1,54,98,000 रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सिम कार्ड तस्करी
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा है। आरोपी उमंग लाकोड पर आरोप है कि उसने कंबोडिया स्थित साइबर अपराधियों को 1,000 से अधिक सक्रिय सिम कार्ड तस्करी के जरिए भेजे थे। इन सिम कार्डों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी करने और अपनी पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
नवी मुंबई पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए आरोपी को वडोदरा से दबोचा। तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 347 सिम कार्ड पाउच, तीन मोबाइल फोन, दो डेबिट कार्ड, छह चेकबुक, एक बैंक पासबुक और दो आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या कंबोडिया से संचालित होने वाले इस गिरोह के अन्य सदस्य भारत में मौजूद हैं।
सावधानी ही बचाव है
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे व्हाट्सएप, सिग्नल या टेलीग्राम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और संदेशों से सावधान रहें। यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आपको वीडियो कॉल पर डराने की कोशिश करे या तत्काल पैसे की मांग करे, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।