मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए एक मील का पत्थर बताया। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और ULLAS योजना के तहत उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षरता हासिल की।
उत्ताराख़ण्ड ने बुधवार को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के अंतर्गत देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनकर इतिहास रचा। इस उपलब्धि को राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने "माइलस्टोन" कहा, जो सामाजिक एवं आर्थिक विकास की नई दिशा दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
भारत में साक्षरता दर को सुधारने के लिए कई दशक पहले से विभिन्न योजनाएँ चलाई जा रही हैं, परंतु 2020 में पेश की गई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी ने शिक्षा को अधिक समावेशी, जीवन भर सीखने योग्य और गुणवत्तापूर्ण बनाने का लक्ष्य रखा। इस नीति के तहत प्रत्येक राज्य को 2030 तक पूर्ण साक्षरता हासिल करने के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए थे।
ULLAS कार्यक्रम की भूमिका
ULLAS, या "समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ", एक बहु-स्तरीय पहल है जो स्कूल से बाहर की शिक्षा, कौशल विकास एवं निरंतर सीखने के अवसरों को जोड़ती है। उत्तराखंड सरकार ने इस कार्यक्रम को स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, NGOs और निजी क्षेत्र के साथ मिलाकर लागू किया, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में भी साक्षरता को बढ़ावा मिला।
उत्ताराख़ण्ड की प्रगति की कहानी
पिछले दो दशकों में उत्तराखंड ने साक्षरता दर में उल्लेखनीय सुधार किया है। 2001 में साक्षरता दर 66.7% थी, जो 2011 में 79.6% तक बढ़ी। 2023 में आधिकारिक आंकड़े 92% से अधिक दिखाते हैं, जिससे राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर "पूर्ण साक्षरता" की मानदंड को पूरा किया। इस सफलता के पीछे सरकार की निरंतर निवेश, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा संसाधनों का विस्तार, और विशेष रूप से महिला एवं शहरी-ग्रामीण अंतर को पाटने की रणनीतिक योजना का बड़ा योगदान है।
भविष्य के प्रभाव
पूर्ण साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि आर्थिक उत्पादकता, सामाजिक समावेश और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार का आधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की इस उपलब्धि से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी, और युवा वर्ग में उद्यमशीलता की प्रवृत्ति सुदृढ़ होगी। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बनकर कार्य करेगा, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्य अधिक वास्तविकता के करीब पहुँचेंगे।
सरकार ने अगले चरण में साक्षरता को "साक्षरता से परे" ले जाने की योजना बनाई है, जिसमें उच्च शिक्षा की पहुंच, तकनीकी कौशल एवं नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है। यह निरंतर सीखने की संस्कृति उत्तराखंड को भारत के विकास मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिला रही है।