पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा यूजीसी मानकों को ऊँचा करके किए गए 123 एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर (रसायन विज्ञान) पदों के चयन को वैध ठहराया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि नियोक्ता को सर्वोत्तम योग्य उम्मीदवार चुनने का अधिकार है, बशर्ते न्यूनतम मानकों को घटाया न जाए।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सार्वजनिक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा अगस्त 2024 में जारी विज्ञापन के विरुद्ध दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया। इस विज्ञापन में रसायन विज्ञान विषय में 123 कॉलेज कैडर एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर पदों की भर्ती के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट और विषय ज्ञान परीक्षण (Subject Knowledge Test) दोनों को अनिवार्य किया गया था।
पृष्ठभूमि और कानूनी मुद्दे
याचिकाकर्ता रेनु कुमारी रोहल ने कहा कि यूजीसी (University Grants Commission) 2018 के नियमों के तहत केवल न्यूनतम मानक निर्धारित हैं, और राज्य द्वारा इन मानकों को बदलना प्रतिवादी के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि विषय ज्ञान परीक्षण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उम्मीदवारों की योग्यता पहले ही TGC (ट्रेनिंग ग्रेडिंग कमेटी) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन की जा चुकी है।
कोर्ट का निर्णय
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरा की बेंच ने कहा कि "नियोक्ता को सर्वोत्तम उपलब्ध प्रतिभा को नियुक्त करने का अधिकार है, न कि केवल न्यूनतम मानक को पूरा करने वाले को"। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यूजीसी के नियम केवल न्यूनतम बेंचमार्क निर्धारित करते हैं, और राज्य को अतिरिक्त मानक जोड़ने से वह प्रतिबंधित नहीं है, बशर्ते मूल मानकों को घटाया न जाए।
कोर्ट ने यह भी माना कि चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद बिना किसी आपत्ति के आगे चुनौती देना अस्वीकार्य है, क्योंकि यह "स्वीकृति" माना जाता है। इसलिए, रेनु कुमारी रोहल की याचिका अस्थिर रही।
भविष्य की सुनवाई
हालाँकि, जस्टिस बरा ने दो प्रश्नों को बड़े बेंच के समक्ष भेजा: (1) क्या राज्य सरकार यूजीसी के न्यूनतम मानकों से अधिक कठोर मानक लगा सकती है, जिसमें स्क्रीनिंग टेस्ट और विषय ज्ञान परीक्षण शामिल हों? (2) क्या राज्य को यूजीसी नियमों को पूरी तरह अपनाना अनिवार्य है? इन प्रश्नों को आगे के न्यायिक निर्णय के लिए Acting Chief Justice के संज्ञान में रखा गया।
प्रभाव और संभावित परिणाम
यदि बड़े बेंच ने राज्य की अधिकारिता का समर्थन किया, तो यह भारत के कई राज्यों में उच्च शिक्षा भर्ती के ढाँचे को बदल सकता है। इससे राज्य‑स्तरीय संस्थानों को अधिक कठोर चयन मानक अपनाने की अनुमति मिल सकती है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है, परन्तु उम्मीदवारों के लिए प्रवेश की बाधाएँ भी बढ़ सकती हैं।