जयपुर के नियरजा मोदी स्कूल में एक 9 साल की छात्रा की आत्महत्या के मामले में माता‑पिता ने नई सीसीटीवी वीडियो जारी की, जिसमें छात्रा का स्पष्ट तनाव दिखता है। इस नई साक्ष्य ने चार्जशीट की पूरीता पर सवाल उठाए और स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नयी सीसीटीवी फुटेज में छात्रा का स्पष्ट तनाव दिखता है
- परिवार ने चार्जशीट को अधूरा बताकर अतिरिक्त आरोप लगाये
- सीबीएसई ने स्कूल की संबद्धता रद्द की, लेकिन हाई कोर्ट ने रिलीफ़ दिया
जयपुर के नियरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा विजय मीना की माता‑पिता ने हाल ही में एक नया सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया, जिसमें वह कक्षा में स्पष्ट रूप से तनावग्रस्त दिख रही है। यह वीडियो उस घटना से जुड़ा है, जब 1 नवंबर 2025 को वह स्कूल की चौथी मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर बैठी।
घटना की पृष्ठभूमि और सीसीटीवी का खुलासा
भूतपूर्व रिपोर्टों के अनुसार, छात्रा को लगातार सहपाठियों द्वारा बुली किया गया था और वह कई बार कक्षा शिक्षक पुनीता शर्मा से मदद की अपील करती रही, परंतु कोई ठोस समाधान नहीं निकला। माता‑पिता का कहना है कि इस नई फुटेज में वह लगातार शिक्षक को रोक‑रोक कर समझाने की कोशिश कर रही है, परंतु उसे कोई सुरक्षा या काउंसलिंग नहीं मिली।
चार्जशीट और कानूनी प्रतिवाद
जिला पुलिस ने 8 महीने बाद एक चार्जशीट दायर की, जिसमें स्कूल के मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे और शिक्षक पर विभिन्न धारा के तहत आरोप लगाए गये। हालांकि, पिता विजय मीना ने कहा कि चार्जशीट अधूरी है, क्योंकि इसमें शिक्षक पर आत्महत्या में साजिश का आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने यह भी माँगा कि स्कूल प्रबंधन को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत दंडित किया जाए, क्योंकि उनका कर्तव्य था कि वे छात्रा की सुरक्षा, निगरानी और कल्याण सुनिश्चित करे।
सीबीएसई की कार्रवाई और न्यायिक विकास
भविष्य में इस घटना को “पूरी तरह से रोका जा सकता था” कहा गया, और सीबीएसई ने स्कूल की वरिष्ठ माध्यमिक संबद्धता रद्द कर दी, जबकि कक्षा 10 और 12 के छात्रों को अगले शैक्षणिक सत्र में परीक्षा देने की अनुमति दी। हाई कोर्ट ने बाद में इस निर्णय को रद्द कर स्कूल को सुधार के लिए समय दिया।
सिस्टमिक मुद्दे और भविष्य की दिशा
एक माता‑पिता समूह, संयुक्त अभिभावक संघ, ने बताया कि 2024‑26 के दौरान नियुक्त 102 नए शिक्षकों में से केवल 17 ही नियमानुसार योग्य थे, जबकि 85 शिक्षक अनुपयुक्त थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिक्षक भर्ती में गंभीर लापरवाही हुई है, जो स्कूल की सुरक्षा ढांचे को कमजोर बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएँ पुनरावृत्ति रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कड़ाई से ऑडिट और छात्र कल्याण के लिए अनिवार्य काउंसलिंग प्रोटोकॉल लागू करने की जरूरत है।