आईआईटी गुवाहाटी ने 28वीं दीक्षांत समारोह में 2,265 छात्रों को डिग्री प्रदान की, जिसमें 412 पीएचडी और द्वि‑डिग्री स्नातक शामिल हैं। संस्थान ने 300 करोड़ रुपये मूल्य के 290 शोध‑परामर्श परियोजनाओं और नई रोबोटिक्स‑एआई एमटेक कार्यक्रम को भी उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 2,265 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई
- 412 पीएचडी एवं द्वि-डिग्री स्नातक
- इंडस्ट्री सहयोग और नई MTech कार्यक्रम
आईआईटी गुवाहाटी ने रविवार को अपने 28वें दीक्षांत समारोह में 2,265 छात्रों को डिग्री प्रदान की। इस बैच में 982 स्नातक, 871 स्नातकोत्तर और 412 पीएचडी एवं द्वि‑डिग्री (एमएस + पीएचडी) शोधकर्ता शामिल थे। यह आंकड़ा संस्थान के 32‑वर्षीय इतिहास में अब तक के कुल 26,790 स्नातकों के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है।
डिग्री वितरण और सम्मान
स्नातक स्तर पर 932 छात्रों ने बी‑टेक तथा 50 छात्रों ने बैचलर ऑफ़ डिज़ाइन (BDes) प्राप्त किया। पोस्ट‑ग्रेजुएट स्तर पर 556 एम‑टेक, 170 एमएससी, 60 एम‑डिज़ाइन, 44 एमए, 27 एमबीए और 14 एमएस (रिसर्च) डिग्री दी गई। चार स्वर्ण पदक और अठारह रजत पदक उत्कृष्ट छात्रों को सम्मानित करने के लिए प्रदान किए गए, जिसमें डेटा साइंस एवं एआई बी‑टेक छात्र साप्तर्शी मुखर्जी को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक मिला।
शोध‑परामर्श एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान ने बताया कि वर्तमान में वह लगभग 290 शोध‑परामर्श परियोजनाओं को संभाल रहा है, जिनका सम्मिलित मूल्य लगभग 300 करोड़ रुपये है। यह संख्या आईआईटी गुवाहाटी की अनुसंधान शक्ति और उद्योग‑विश्वविद्यालय सहयोग की तीव्रता को दर्शाती है। साथ ही, जापान और यूनाइटेड किंगडम के साथ एआई, स्वास्थ्य‑सेवा, शोध एवं छात्र गतिशीलता के क्षेत्रों में नई साझेदारियाँ स्थापित की गई हैं।
नया एमटेक कार्यक्रम – रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
इंस्टीट्यूट ने हाल ही में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में विशेषीकृत एमटेक कार्यक्रम शुरू किया, जिससे भारत में उन्नत तकनीकी कौशल वाले स्नातकों की संख्या में वृद्धि होगी। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर स्वचालन और डिजिटल परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।
भविष्य की दृष्टि
आईआईटी गुवाहाटी ने अपने शैक्षणिक और अनुसंधान क्षितिज को निरंतर विस्तारित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। संस्थान का लक्ष्य न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना बल्कि स्थानीय उद्योग, स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक साझेदारियों के बीच पुल बनाना है, जिससे भारत की विज्ञान‑प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जा सके।