पूर्व माराथन निदेशक क्रिस्टरोफ़ बार्टलेट ने सोनी और बंगी के खिलाफ 200 मिलियन डॉलर के गलत बर्खास्तगी दावे के बाद निपटारा कर लिया है। दोनों कंपनियों ने आरोप लगाये कि बार्टलेट पर अनुचित व्यवहार का जाँच किया गया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया। निपटारे की शर्तें अभी गोपनीय हैं, पर यह घटना गेमिंग उद्योग में कार्यस्थल की नीतियों पर नया प्रकाश डालती है।
क्रिस्टरोफ़ बार्टलेट का नाम 25 वर्षों से बंगी के प्रमुख खेलों, विशेषकर ‘मैराथन’ और ‘डेस्टिनी 2’ के विकास से जुड़ा हुआ है। मार्च 2024 में उनके इस्तीफे की खबर ने उद्योग में हलचल मचा दी, क्योंकि बाद में यह पता चला कि बंगी ने एक आंतरिक जाँच के बाद उन्हें बर्खास्त किया था, जिसमें आठ महिलाओं ने अनुकूल व्यवहार के आरोप लगाए थे। बार्टलेट ने कहा कि उन्हें कभी भी असुविधा महसूस नहीं हुई और यदि किसी को ऐसा लगा तो वह क्षमा चाहते हैं।
क़ानूनी लड़ाई और निपटारा
बार्टलेट ने 200 मिलियन डॉलर के गलत बर्खास्तगी मुकदमे का दायर किया, जिसमें उन्होंने सोनी और बंगी पर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिष्ठा नष्ट करने और ‘असंगत जाँच’ के माध्यम से उनके कार्यकुशलता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। 2025 के दिसंबर में डेलावेयर कोर्ट ऑफ़ चान्सरी ने क्षेत्राधिकार की कमी के कारण मामला खारिज कर दिया, पर जनवरी में बार्टलेट ने फिर से दायर किया। अब, 8 जुलाई को उन्होंने निपटारे की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि “मुझे अपने गेमिंग सफ़र पर आगे बढ़ने का समय मिला है।”
निपटारे के विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किये गये हैं, पर एक संयुक्त बयान में कहा गया कि बार्टलेट ने 25 वर्षों में बंगी की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके नाम को ‘मैराथन’ के क्रेडिट में शामिल किया गया।
उद्योग पर प्रभाव
इस निपटारे के बाद बंगी को और भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि पिछले महीने में 292 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था, जिनमें ‘डेस्टिनी 2’ टीम के अधिकांश सदस्य शामिल थे। यह घटना कार्यस्थल की सुरक्षा और पारदर्शिता के सवालों को फिर से उजागर करती है, खासकर जब बड़े पैमाने पर छंटनी और कॉर्पोरेट पुनर्गठन चल रहे हों।
सोन्य और बंगी दोनों ने अपनी नीतियों में सुधार की बात कही है, पर उद्योग के भीतर यह स्पष्ट हो गया है कि बड़े गेमिंग स्टूडियो में भी मानव संसाधन प्रबंधन और कानूनी प्रक्रियाएँ जटिल हो सकती हैं। बार्टलेट का निपटारा यह दर्शाता है कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों के साथ न्यायसंगत व्यवहार करने के साथ-साथ कानूनी दावों के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए।