कर्नाटक सरकार ने जलाशयों में कम पानी के कारण घटती हाइड्रोपावर को पूरा करने के लिए निजी को‑जनरेशन इकाइयों से बिजली खरीदने का फैसला किया है। साथ ही सौर, पवन और थर्मल उत्पादन को अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्नाटक ऊर्जा विभाग ने गुरुवार को एक उच्च‑स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी विद्युत आपूर्ति कंपनियों को सौर, पवन और थर्मल उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया। यह कदम राज्य में लगातार गिरते हुए जल‑भंडारण और एल नीनो से उत्पन्न कम वर्षा के कारण हाइड्रोपावर उत्पादन में भारी कमी को पाटने के लिए उठाया गया है।
वर्तमान संकट और उसका कारण
एल नीनो के प्रभाव से कर्नाटक के प्रमुख नदियों के जलस्रोतों में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिससे प्रमुख जलाशयों के स्तर घट गए हैं। शरावती जलविद्युत परियोजना, जिसकी स्थापित क्षमता 1,035 मेगावॉट है, अब केवल लगभग 100 मेगावॉट ही उत्पादन कर रही है। इस गिरावट के कारण राज्य के कुल विद्युत मिश्रण में हाइड्रोपावर का हिस्सा इस साल लगभग 10 % तक गिर गया है, जो पिछले पाँच वर्षों के औसत से दो गुना अधिक है।
को‑जनरेशन प्लांट्स से तत्काल खरीद
पर्यायी उपायों के रूप में, अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता ने निजी को‑जनरेशन प्लांट्स से बिजली खरीदने के लिए त्वरित अनुबंध करने का निर्देश दिया। को‑जनरेशन प्लांट्स, जो औद्योगिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ विद्युत उत्पादन करते हैं, लगभग 2,000 मेगावॉट की अतिरिक्त क्षमता प्रदान कर सकते हैं। यह क्षमता मौजूदा थर्मल पॉवर प्लांट्स (रायचूर और बेल्लारी) के 5,000 मेगावॉट उत्पादन को पूरक करेगी, जिससे बेस‑लोड गैप कम हो सकेगा।
थर्मल, सौर और पवन उत्पादन का विस्तार
कर्नाटक के तीन प्रमुख थर्मल प्लांट्स ने पहले ही अपनी आउटपुट को 90 % से अधिक तक बढ़ा दिया है। साथ ही, राज्य ने नई सौर और पवन परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए हैं, जिनका लक्ष्य अगले दो वर्षों में नवीकरणीय क्षमता को 3,500 मेगावॉट तक ले जाना है। यह नवीकरणीय लक्ष्य न केवल जल‑आपूर्ति की अनिश्चितता को संतुलित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भारत के कार्बन‑उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य में भी योगदान देगा।
पिछले वर्ष की तुलना और भविष्य की दिशा
2023 में भी कर्नाटक ने समान मोनसून घाटे का सामना किया था, तब राज्य ने उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे उत्तर भारतीय राज्यों से आपातकालीन बिजली खरीद कर काली बिजली को रोका था। उस समय लगभग 1,000 मेगावॉट की निजी उत्पादन से खरीदी गई थी। इस बार सरकार ने सीख लेकर को‑जनरेशन प्लांट्स के साथ दीर्घकालिक समझौते करने का फैसला किया है, जिससे भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयार रह सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल‑वायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए कर्नाटक को अब ऊर्जा मिश्रण में लचीलापन लाना अनिवार्य हो गया है। यदि जल‑आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो अगले गर्मियों में बिजली कटौती का जोखिम फिर से बढ़ सकता है। इसलिए, नवीकरणीय ऊर्जा और को‑जनरेशन का संतुलित उपयोग राज्य की ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी बन गया है।