अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान से आयी धूल‑भरी हवाओं ने दिल्ली के AQI को 261 तक बढ़ा दिया, जिससे वायु गुणवत्ता 85‑दिन के बाद 'पुअर' श्रेणी में पहुंच गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अफ़गानिस्तान के धूल‑आंदोलन ने दिल्ली में AQI को 261 तक पहुंचाया
  • वायु गुणवत्ता 85 दिन में सबसे खराब – 'पुअर' श्रेणी
  • GRAP चरण‑I नहीं लागू, लेकिन धूल नियंत्रण के उपायों को तेज किया गया

दिल्ली में रविवार को वायु गुणवत्ता में अचानक गिरावट आई, जब उत्तर‑पश्चिमी भारत में प्रवेश कर चुकी धूल‑भरी हवाओं ने एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को 261 तक पहुंचा दिया। यह स्तर 85 दिन में सबसे अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले अप्रैल 17 को देखी गई 263 की सीमा के बाद का सबसे गंभीर आंकड़ा है।

पृथ्वी‑पर्यावरणीय पृष्ठभूमि

अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान में चल रही तेज़ हवाओं ने धूल के कणों को विस्तृत दूरी तक ले जाया। इन कणों में PM10 की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो इंदो‑गंगा समतल की सतह पर ठोस रूप में जमा हो जाती है। इस प्रकार के ट्रांसनेशनल धूल‑आंदोलन पूर्वी एशिया में कई बार दर्ज हुए हैं, लेकिन इस बार उनका प्रभाव दिल्ली में अत्यधिक स्पष्ट रहा।

स्थानीय मौसम और तापमान की स्थिति

इंडियन मौसम विभाग (IMD) ने 5.30 pm पर महसूस‑तापमान 45.7 °C बताया, जबकि अधिकतम तापमान 36.8 °C और न्यूनतम 28.3 °C दर्ज किया गया। ये आँकड़े सामान्य से 1‑2 °C अधिक थे, जिससे नागरिकों को असहजता का अनुभव हुआ। पॉलम, लोड़ी रोड और रिज़ जैसे स्थानों पर तापमान 36‑37 °C तक पहुँचा, जबकि आर्द्रता 52‑64 % के बीच रही।

प्राधिकरणों की प्रतिक्रिया

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बताया कि धूल‑आंदोलन के कारण AQI में वृद्धि हुई, इसलिए ग्रुप एशिया‑पैसिफिक (GRAP) चरण‑I के नियंत्रण उपाय लागू नहीं किए गए। हालांकि, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को धूल‑नियंत्रण के उपाय तेज करने का निर्देश दिया गया। भविष्यवाणी के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक AQI 'पुअर' श्रेणी में रह सकता है, परंतु धूल‑आंदोलन कम होते ही स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव

उच्च PM10 स्तर श्वसन रोग, अस्थमा और एलर्जी को बढ़ा सकता है। विशेषकर बुजुर्ग, बच्चों और पुरानी श्वसन समस्याओं वाले लोगों को बाहर की गतिविधियों से बचने तथा मास्क पहनने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस अवसर पर सार्वजनिक चेतावनी जारी की है, जिससे नागरिकों को उचित सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद मिल सके।