बिग बॉस OTT 2 की प्रतियोगी पूजा भट्ट ने शो के दूसरे हफ्ते में अपने स्तन में लम्प महसूस किया और उसे कैंसर का शक हुआ। डॉक्टर की त्वरित जांच से यह पता चला कि लम्प बिनाइन है, जिससे महिलाओं को शुरुआती जांच की महत्ता समझ में आई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बिग बॉस OTT में पूजा भट्ट ने ब्रेस्ट लम्प की पहचान की
- डॉक्टर ने तुरंत मैमोग्राफी कराई, कैंसर नहीं पाया गया
- नए लम्प की दो हफ़्ते में जांच कराना आवश्यक है
बिग बॉस OTT 2 के सेट में एक अनपेक्षित स्वास्थ्य संकट ने अभिनेत्री पूजा भट्ट को घेर लिया। रियलिटी शो के दूसरे हफ़्ते में शॉवर लेते समय उन्होंने अपने बाएँ स्तन में एक लम्प देखा, जिसे उन्होंने शुरुआती तौर पर हार्मोनल बदलाव या कीटों के कारण समझा।
लम्प की पहचान और शुरुआती डर
पूजा ने सायरस ब्रोचा को बताया कि लम्प न तो गायब हुआ और न ही दर्द दिया, जिससे वह चिंतित हो गईं। तीसरे हफ़्ते तक लम्प का आकार वही रहा, इसलिए उन्होंने इसे कैंसर का संदेह माना और कहा, “अगर यह कैंसर है तो हमें केवल छह हफ़्ते बचे हैं।” यह आत्मीय बयान दर्शकों के बीच जागरूकता बढ़ाने में मददगार रहा।
तत्काल चिकित्सा सहायता
शो के विस्तार के बाद पूजा ने मेडिकल टीम से सलाह ली। हिन्दुजा अस्पताल के एक अनुभवी डॉक्टर ने तुरंत मैमोग्राफी की सलाह दी। अगले दिन उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें आंखों पर पटी बांध कर इमेजिंग के लिए बाहर निकाला गया। परिणामस्वरूप, सोनोग्राफी ने कैंसर को खारिज कर दिया, जिससे उनका भय समाप्त हुआ।
विशेषज्ञ की राय: शुरुआती जांच का महत्व
डॉ. स्नেহा कोमिनेंनी, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एस्टर आरवी अस्पताल, ने बताया कि 80‑90% ब्रेस्ट लम्प बिनाइन होते हैं, जैसे फाइब्रोएडेनोमा, सिस्ट, या हार्मोनल बदलाव। फिर भी, कोई भी नया लम्प, चाहे दर्द रहित हो, दो हफ़्ते के भीतर डॉक्टर से जांच करवाना चाहिए।
भ्रम और आत्म-जागरूकता
डॉ. कोमिनेंनी ने यह भी कहा कि दर्द के अभाव से लम्प बिनाइन समझना ग़लत है; कई शुरुआती कैंसर दर्द रहित होते हैं। महिलाओं को अपने स्तनों की सामान्य बनावट और महसूस को जानना चाहिए, ताकि कोई भी परिवर्तन तुरंत रिपोर्ट किया जा सके। स्क्रीनिंग मैमोग्राफी आमतौर पर 40 वर्ष की आयु से शुरू होती है, जबकि उच्च जोखिम वाले रोगियों को इससे पहले जांच करानी चाहिए।
पूजा भट्ट की इस कहानी ने सोशल मीडिया पर स्तन स्वास्थ्य की चर्चा को बढ़ावा दिया है, जिससे महिलाओं को समय पर जांच करने की प्रेरणा मिली है।