संकरा नेत्रालय ने 9-11 जुलाई को आयोजित रेटिना समिट 008 में राष्ट्रीय स्तर के 200 से अधिक प्रतिभागियों को आकर्षित किया। इस वर्ष का थीम 'क्राइसिस कंट्रोल' है, जिसमें रेटिना सर्जरी में जटिलताओं की रोकथाम और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रिटिना समिट का थीम ‘क्राइसिस कंट्रोल’ है
  • 200 से अधिक युवा विट्रियोरेटिनल सर्जन भाग लेंगे
  • स्टीव चार्ल्स ने प्रमुख कीनोट दिया

संकरा नेत्रालय के विट्रियोरेटिनल सर्विसेज विभाग ने अपने वार्षिक वैज्ञानिक सम्मेलन, रेटिना समिट 008, 9 से 11 जुलाई तक आयोजित किया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम देश भर से लगभग दो सौ युवा विट्रियोरेटिनल सर्जनों को एक मंच पर लाता है, जहाँ वे नवीनतम प्रौद्योगिकी और सर्जिकल तकनीकों से परिचित हो सकते हैं।

समिट का थीम: क्राइसिस कंट्रोल

इस वर्ष का थीम “क्राइसिस कंट्रोल” है, जिसका उद्देश्य रेटिना प्रैक्टिस में चिकित्सा और शल्य जटिलताओं की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी प्रबंधन पर प्रकाश डालना है। रेटिना रोगों की जटिलता और संभावित जटिलताओं को देखते हुए यह थीम चिकित्सकों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, विशेषकर उन सर्जनों के लिए जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं।

पूर्व-सम्मेलन कार्यक्रम

9 जुलाई को आयोजित पूर्व-सम्मेलन में समर्पित व्याख्यान और हैंड‑ऑन प्रशिक्षण सत्र शामिल थे। अनुभवी प्रशिक्षकों ने माइक्रोसर्जरी, इंट्राविट्रियल इंजेक्शन और पोस्ट‑ऑपरेटिव देखभाल पर व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया, जिससे युवा सर्जनों को वास्तविक क्लिनिकल स्थितियों का सामना करने की तैयारी मिली।

मुख्य वैज्ञानिक सत्र एवं प्रमुख वक्ता

10 और 11 जुलाई को मुख्य वैज्ञानिक सत्र आयोजित हुए, जिनमें संकरा नेत्रालय के साथ-साथ भारत के प्रमुख नेत्र अस्पतालों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। समिट के मुख्य कीनोट में विश्व प्रसिद्ध विट्रियोरेटिनल सर्जन स्टीव चार्ल्स ने भाग लिया, जिन्होंने वैश्विक रेटिना सर्जरी में नवीनतम प्रगति और रोगी सुरक्षा के सर्वोत्तम अभ्यासों पर प्रकाश डाला।

भविष्य की दिशा और प्रभाव

इस प्रकार के सम्मेलन न केवल ज्ञान का आदान‑प्रदान करते हैं, बल्कि भारत में विट्रियोरेटिनल सर्जरी के मानकों को ऊँचा उठाते हैं। प्रतिभागी अपने नेटवर्क को विस्तारित कर रहे हैं, जिससे भविष्य में सहयोगात्मक शोध और रोगी‑केंद्रित देखभाल मॉडल की संभावनाएँ बढ़ेंगी। समिट के बाद, कई सर्जन अपने क्लिनिक में “क्राइसिस कंट्रोल” प्रोटोकॉल को लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिससे रोगी परिणामों में सुधार की आशा है।