संयुक्त राज्य ने हर्मुज के जलमार्ग में जहाज़ों पर इरानी हमलों के जवाब में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिससे इरान के गार्ड ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर प्रतिप्रहार किया। दोनों पक्षों ने दर्जनों लक्ष्यों को मारने की पुष्टि की।

अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज में व्यापारिक जहाज़ों पर इरान के हमलों के बाद इरान पर एक श्रृंखला में बड़े पैमाने के हवाई और समुद्री हमले शुरू किए। इस कार्रवाई ने मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया, जहाँ इरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

पिछला इतिहास और रणनीतिक महत्व

हर्मुज के जलमार्ग को विश्व के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है; यहाँ से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में कई बार इरान-यूएस टकराव हुए हैं, जिसमें 2019 में तेल टैंकों पर इरानी ड्रोन हमले और 2020 में अमेरिकी ड्रोन को इरानी फौज ने नीचे गिराया था। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच पारस्परिक अविश्वास को गहरा किया है और क्षेत्रीय सुरक्षा को अस्थिर किया है।

इंटरनेट पर रिपोर्टेड प्रतिशोधी हमले

इंटरनेट पर उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो के अनुसार, इरान के गार्ड ने बहरीन के अल-डौफ़ा एयर बेस और कुवैत के अल-हज्म एयर बेस पर सटीक मिसाइल प्रहार किया। इरानी बयान में कहा गया कि “हमने अमेरिकी ठिकानों पर लक्षित प्रहार करके उनके आक्रमण को जवाब दिया है”। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि उन्होंने कई इरानी लक्ष्यों को नष्ट किया, लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं की कि इरानी मिसाइलें सफल रही थीं।

संयुक्त राज्य की प्रतिक्रिया और रणनीति

अमेरिकी सेना ने कहा कि उन्होंने “सुरक्षा के लिए आवश्यक” सभी उपाय किए हैं और इरान के आगे के खतरों को रोकने के लिए “सतत निगरानी” जारी रखी है। साथ ही, यूएस ने अपने सहयोगियों को चेतावनी दी कि यदि इरान के हमले आगे बढ़ते रहे तो अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की संभावना है। इस बीच, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तुरंत शांति की अपील की, यह ज़ोर देते हुए कि हर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग पर किसी भी संघर्ष का वैश्विक आर्थिक प्रभाव हो सकता है।

भविष्य की संभावनाएँ और क्षेत्रीय प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि यह चक्रव्यूह अब तक का सबसे तीव्र स्तर पर पहुंच गया है। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद नहीं हुआ तो इस संघर्ष का विस्तार मध्य पूर्व के अन्य देशों, जैसे सऊदी अरब और इज़राइल, तक हो सकता है। इसके अलावा, हर्मुज के बंदरगाह में संभावित बंदिशें वैश्विक तेल कीमतों को बढ़ा सकती हैं, जिससे आर्थिक तनाव और बढ़ेगा। इस परिदृश्य में कूटनीतिक चैनलों को पुनः सक्रिय करने की आवश्यकता स्पष्ट है, ताकि अनियंत्रित सैन्य कार्रवाई से बचा जा सके।