प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दो देशों ने यूरेनियम आपूर्ति और व्यापक आर्थिक सहयोग पर नया समझौता किया। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और Indo‑Pacific रणनीति को सुदृढ़ करता है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बेनेस के साथ नई दिल्ली से आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जुलाई को दो देशों के बीच एक व्यापक आर्थिक सहयोग पैकेज पर हस्ताक्षर किए। इस पैकेज का प्रमुख तत्व यूरेनियम आपूर्ति समझौता है, जो भारत को सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती परमाणु ईंधन प्रदान करेगा।
परमाणु आपूर्ति समझौते की पृष्ठभूमि
2018 में भारत‑ऑस्ट्रेलिया नागरिक परमाणु सहयोग समझौते (CNA) के बाद, दोनों देशों ने कई बार परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने की इच्छा जताई थी। अब, इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया वर्ष 2026‑2035 के दौरान भारत को लगभग 5,000 टन यूरेनियम निर्यात करेगा, जिससे भारत के जलवायु लक्ष्य और ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
आर्थिक सहयोग का विस्तार
परमाणु समझौते के साथ ही, दोनो देशों ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के लिए कई समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें ऑस्ट्रेलिया के खनन, कृषि और शिक्षा संस्थानों को भारत के बड़े बाजार में प्रवेश दिलाने के उपाय शामिल हैं। भारत‑ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय व्यापार को 2025 तक US$30 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
रणनीतिक महत्व और Indo‑Pacific परिप्रेक्ष्य
यह समझौता न केवल आर्थिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि भारत के Indo‑Pacific रणनीतिक परिप्रेक्ष्य को भी सुदृढ़ करता है। यूरेनियम की निरंतर आपूर्ति से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकेगा। साथ ही, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, विशेषकर समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। ऑस्ट्रेलिया की समृद्ध खनिज संसाधन और भारत की विशाल उपभोक्ता बाजार के बीच तालमेल, दोनों अर्थव्यवस्थाओं को परस्पर लाभ पहुंचाएगा। इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, निर्यात विविधीकरण और तकनीकी उन्नति में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।