इरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनी को माशहद के पवित्र इमाम रेजा शहीदों के कब्रिस्तान में दफ़न किया गया। उनका निधन यूएस‑इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के चार महीने बाद हुआ, और शव यात्रा ने देश भर में शोक का माहौल बना दिया।
इरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनी को अपने जन्मस्थल माशहद में इमाम रेजा शहीदों के कब्रिस्तान में दफ़न किया गया। यह दफ़न चार महीने बाद हुआ, जब यूएस‑इज़राइल गठबंधन द्वारा किए गए हवाई हमलों ने खामेनी को मार दिया था, जिससे मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की शुरुआत हुई।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक महत्व
खामेनी ने लगभग सैंतीस वर्षों तक इरान की नीति को आकार दिया, प्रतिपक्षी पश्चिमी दबावों के खिलाफ कड़ी रुख अपनाते हुए। उनका निधन 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों के बाद एक राष्ट्रीय शोककाल का आरम्भ कर गया। माशहद में दफ़न होना ऐतिहासिक रूप से दुर्लभ है; केवल नादर शाह (1747) ही पहले इस शहर में दफ़न हुए थे, जो खामेनी को इस प्रतिष्ठित स्थान पर रखता है।
शव यात्रा और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
शव यात्रा का आरम्भ पिछले शनिवार से हुआ, जब तहरीर, कास्पर, और अन्य प्रमुख शहरों में सड़कों को बंद कर दिया गया, हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित किया गया और दैनिक जीवन ठहर गया। लाखों शोकाकुल लोग इमाम रेजा शहीदों के परिसर तक पहुंच कर अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने आए। सबसे बड़े समारोह में खामेनी के सबसे बड़े पुत्र मोस्तफा खामेनी ने प्रार्थना का नेतृत्व किया, जबकि उत्तराधिकारी मोज़ताबा खामेनी ने अनपेक्षित रूप से अनुपस्थित रहकर सवाल खड़े किए।
भूराजनीतिक माहौल
दफ़न उसी समय हुआ जब यूएस और इरान के बीच तनाव फिर से बढ़ा था। वॉशिंगटन ने दो दिन तक हवाई हमलों की श्रृंखला चलायी, जिसका कारण इरान पर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले का आरोप था। इसके जवाब में इरान ने प्रतिवाद किया, जिससे दोनों देशों के बीच 60‑दिन का निरस्त्रीकरण समझौता (MOU) भी तनावपूर्ण बना रहा। इस समझौते के बावजूद, दफ़न को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक संभावित शांति‑संधि के संकेत के रूप में देखा।
भविष्य की संभावनाएं
खामेनी के उत्तराधिकारी, मोज़ताबा, की अनुपस्थिति और उनके चार पुत्रों में से दो के शोक में भाग लेने से इरान के भीतर सत्ता संतुलन पर नई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, इस दफ़न से इरान की आंतरिक एकता और बाहरी दबावों के बीच की नाजुक संतुलन पर प्रकाश पड़ता है, जो आने वाले महीनों में क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है।