इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इरान दो पिछले इज़राइली अभियानों से कमजोर हो चुका है और अब इज़राइल "बड़ी शक्ति" के साथ इरान पर हमला करने को तैयार है। यह बयान हालिया अमेरिकी हवाई हमलों के बाद आया है।
इज़राइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इरान को पहले दो इज़राइली सैन्य अभियानों से काफी क्षति पहुँची है, जिससे वह अब "भारी बल" के साथ लक्ष्य बन गया है। उन्होंने कहा कि इज़राइल का अपना एयर डिफेंस और मिसाइल क्षमताएँ तैयार हैं, और यदि आवश्यक हुआ तो इरान पर "बड़े पैमाने" का हमला किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और पूर्व अभियानों का सारांश
इज़राइल ने 2019 में इराक में स्थित इरानी एंटी‑एयर साइटों और 2021 में सीरियाई सीमा के पास इरानी सैन्य ठिकानों पर दो बड़े हवाई अभियानों को अंजाम दिया था। दोनों अभियानों में इरान की एंटी‑एयर रडार, एंटी‑एयरक्राफ्ट, और कम्यूनिकेशन नेटवर्क को लक्ष्य बनाया गया, जिससे इरान की प्रतिरक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय गिरावट आई।
अमेरिकी स्ट्राइक और उनका प्रभाव
पिछले हफ़्ते, अमेरिकी सैन्य दलों ने इरान के कुछ प्रमुख सैन्य स्थलों पर हवाई हमले किए, जिसमें मिसाइल लॉन्च पैड और तेल भंडारण सुविधाएँ शामिल थीं। इन हमलों ने इरान की रणनीतिक गहराई को और कमजोर कर दिया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति और भी तीव्र हो गई। इज़राइल ने इस अमेरिकी कार्रवाई को "संदेश" के रूप में कहा, जिसका उद्देश्य इरान को आगे के आक्रामक कदमों से रोकना है।
भविष्य की संभावनाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इज़राइल की इस चेतावनी के बाद, कई प्रमुख देशों ने अपनी नीतियों को स्पष्ट किया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इज़राइल को "समर्थन" का आश्वासन दिया, जबकि यूरोपीय संघ ने किसी भी आगे के सैन्य कदम को "सावधानीपूर्वक" मूल्यांकन करने की बात कही। इरान ने भी प्रतिप्रतिक्रिया में कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों पर विचार करेगा।
स्थिरता की चुनौती
इज़राइल-इरान संबंधों में यह नवीनतम तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों ने कूटनीतिक चैनल बंद कर दिए तो अस्थिरता का विस्तार न केवल मध्य पूर्व में बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी झलक सकता है। इस कारण, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तनाव को डिप्लोमैटिक साधनों से सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव से बचा जा सके।