अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इरान पर हवाई हमले रोकने की घोषणा की, परंतु उसी शाम चाबहार सहित कई क्षेत्रों में अनाम मिसाइल हमले हुए। इस अटैक की जिम्मेदारी अभी तक स्पष्ट नहीं हुई, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अमेरिकी सेना ने इरान पर हमले रोकने की घोषणा की, पर फिर भी नई हवाई हमले हुए
- चाबहार, बुशहर, सिस्तान‑बलूचिस्तान में अनाम मिसाइलों की गिरावट
- जवाबदेही अभी तक नहीं मिली, इरान‑यूएई‑सऊदी संबंध तनाव में
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 10 जुलाई को स्थानीय समय अनुसार सुबह 6:30 बजे यह घोषणा की कि वह इरान पर अपने हवाई अभियानों को समाप्त कर रहा है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बड़ी आशा लेकर आया, क्योंकि पिछले महीनों में इरान‑अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। हालांकि, उसी दिन के बाद इरान के दक्षिणी प्रांतों, विशेषकर चाबहार, बुशहर, और सिस्तान‑बलूचिस्तान में अनपेक्षित मिसाइल और बमबारी की रिपोर्टें सामने आईं।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
इरान और अमेरिका के बीच शत्रुता 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही गहरी है। 2018 में अमेरिका ने इरान पर पुनः आर्थिक प्रतिबंध लगाए और 2020 में इराक में इरानी जनरल सौदी को मारने वाले ड्रोन हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव शिखर पर पहुँच गया। इस माह में, इरान ने यूएस‑नाटो गठबंधन के खिलाफ कई हवाई चेतावनियों को जारी किया था, जबकि अमेरिकी सैन्य दलों ने मध्य पूर्व में अपनी उपस्थिति को बढ़ाया था।
नए अटैक की विशेषताएँ
नए अटैक में उपयोग की गई मिसाइलों की तकनीकी प्रोफ़ाइल अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, परन्तु कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह उन्नत, संभावित रूप से रूसी या चीनी निर्मित प्रणालियों के समान हो सकती है। चाबहार के निकट स्थित तेल टर्मिनलों को लक्ष्य बनाना संकेत देता है कि हमलावर आर्थिक दबाव उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। इरान की आधिकारिक एजेंसियों ने इस अटैक की जिम्मेदारी किसी भी विदेशी शक्ति पर नहीं डाली, जबकि एक सांसद ने संयुक्त अरब अमीरात को संभावित सहयोगी बताकर चेतावनी जारी की।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ और संभावित परिणाम
इरान ने इस घटना के जवाब में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर के खिलाफ प्रत्युत्तरात्मक हवाई हमले किए, जिससे इन देशों में मिसाइल अलार्म बजने लगे। साथ ही, यूएई के शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने कुवैत की यात्रा की, जिससे खाड़ी देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की संभावना बढ़ी। इज़राइल ने भी इस स्थिति को निकटता से देखा, रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इज़राइल इरान के खिलाफ “ब्लू‑व्हाइट” ऑपरेशन करने को तैयार है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि इस अटैक की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हुई, तो इरान‑अमेरिका के बीच फिर से सैन्य टकराव की संभावना बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ, इस मुद्दे पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहे हैं, ताकि हवाई हमलों की लहर को रोका जा सके। साथ ही, तेल बाजार में अस्थिरता भी बढ़ेगी, क्योंकि हेमस्ट्रिंग स्ट्रेट पर दोनों पक्षों की मांगें टकरा रही हैं।
समग्र रूप में, यह रहस्यमयी अटैक न केवल इरान के भीतर सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि मध्य पूर्व में बड़े भू‑राजनीतिक बदलावों की ओर इशारा भी करता है।