न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच से पता चला कि रूसी जासूसी इकाई टोक्यो में स्थित एक गुप्त कार्यालय से जापानी हाई‑टेक घटकों की खरीद और तस्करी कर पुतिन की युद्ध शक्ति को बढ़ा रही है। यह खुलासा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जापान की निर्यात नीतियों पर सवाल उठाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रूसी 20वाँ निदेशालय टोक्यो में स्थित है और जापानी घटकों को मिलाकर मिसाइल व ड्रोन बनाता है।
- उक्रेन के अनुसार, 90% रूसी हथियारों में जापानी हिस्से होते हैं।
- जापान की कमजोर जासूसी कानूनें और धीमी प्रतिक्रिया इस नेटवर्क को जारी रखने में सहायक हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की विस्तृत जांच ने उजागर किया है कि रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी—GRU की 20वीं निदेशालय—टोक्यो की एक ऊँची इमारत में गुप्त रूप से कार्य कर रही है। इस इकाई के प्रमुख, मैक्सिम व्लादिमिरोविच फिल्चेंकोव, 49 वर्ष के अनुभवी अधिकारी, एरोलॉट के 22वें मंजिल के कार्यालय से इस नेटवर्क को संचालित करते हैं, जहाँ वे जापानी कंपनियों से उच्च‑प्रौद्योगिकी घटकों की खरीद और तस्करी का समन्वय करते हैं।
ऑपरेशन की कार्यप्रणाली
फिल्चेंकोव ने जापानी लॉजिस्टिक फर्म प्रोको एयर के साथ गठबंधन किया, जो खुद को "जापान और रूस के बीच पुल" के रूप में प्रस्तुत करती है। प्रोको एयर एरोलॉट के मालवाहक विमानों के माध्यम से क्यूबा, उज़्बेकिस्तान और श्रीलंका जैसे मध्य एशियाई देशों में कार्गो को स्थानांतरित करती है, जहाँ से ये सामान अंततः रूस तक पहुँचाया जाता है। कंपनी के मालिक, ताकेहिको मिकी, ने 2024 में फिल्चेंकोव से संपर्क स्थापित किया, पर उन्होंने दावा किया कि उनका व्यापार केवल अधिकृत वस्तुओं तक ही सीमित है।
उक्रेन के सबूत और जापानी कंपनियों की भूमिका
उक्रेन ने कई बार जापान को सूचित किया कि रूसी हथियारों में जापानी घटक पाए गए हैं। केवल अप्रैल 2025 में ही उक्रेन ने जापान के विदेश मंत्रालय को आठ औपचारिक पत्र भेजे, जिनमें बिन्योन इलेक्ट्रिक, पैनासोनिक और टोशिबा जैसी कंपनियों के घटक मिलते हुए मिसाइलें और ड्रोन का उल्लेख था। इन कंपनियों ने कहा कि उनके घटक कई साल पहले ही बेचे जा चुके थे और वे निर्यात नियमों का पालन करते हैं।
जापान की जासूसी‑संकट में नीति‑गत बाधाएँ
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित प्रतिबंधों के कारण जापान में विदेशी खुफिया एजेंसी की अनुपस्थिति है, जिससे यह जासूसियों के लिये "स्पाय पैरेडाइज़" बन गया है। उक्रेन और पश्चिमी सहयोगियों की कई चेतावनियों के बावजूद जापानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया धीमी रही है। विदेश मंत्रालय ने सैन्य‑संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का दावा किया, पर वास्तविक जासूसी नेटवर्क अभी भी संचालन में है।
भविष्य की संभावनाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
यदि इस नेटवर्क को तुरंत बाधित नहीं किया गया, तो रूसी सेना को उच्च‑प्रौद्योगिकी हथियारों की निरंतर आपूर्ति मिलती रहेगी, जिससे यूरोप और यूक्रेन में युद्ध का तनाव बढ़ सकता है। साथ ही, यह मामला जापान की निर्यात नियंत्रण और जासूसी कानूनों की पुनः समीक्षा को मजबूर कर सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर निर्यात‑नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ करने की मांग बढ़ेगी।