विज़ाखापट्टनम के गांधी सेंटर में बी.वी. फाउंडेशन द्वारा आयोजित शांति बैठक में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और शैक्षणिक विद्वानों ने विश्व शांति के महत्व पर चर्चा की। अध्यक्ष नरव प्रकाश राव ने संवाद की आवश्यकता पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग का उल्लेख किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विश्व शांति पर चर्चा और संवाद की आवश्यकता
- इंटरफेथ और यूएन के सहयोगी प्रयास
- भविष्य में समुद्र तट पर शांति मार्च की योजना
विज़ाखापट्टनम स्थित गांधी सेंटर, डॉ. लंकापल्ली बुल्लाया कॉलेज परिसर में, बी.वी. फाउंडेशन फॉर पीस एंड हार्मनी द्वारा आयोजित विश्व शांति पर एक व्यापक चर्चा का मंच सजा। इस कार्यक्रम का सहयोग अंतर्राष्ट्रीय एसोसिएशन फॉर रिलिजियस फ्रिडम (IARF) ने किया, जिससे स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति के संदेश को मजबूती मिली।
बैठक की रूपरेखा और प्रमुख वक्ता
बैठक की अध्यक्षता IARF के अध्यक्ष नरव प्रकाश राव ने की। उन्होंने सभा की शुरुआत महात्मा गांधी को फूल चढ़ाकर की, जो शांति एवं अहिंसा के प्रतीक के रूप में उनका सम्मान दर्शाता है। अपने उद्घाटन भाषण में राव ने संवाद की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया और IARF के संयुक्त राष्ट्र के साथ परामर्शी भूमिका को उजागर किया।
शैक्षणिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की आवाज़
पूर्व नागरजुना विश्वविद्यालय के उपकुलपति वी. बालमोहन दास ने वैश्विक संघर्षों में वृद्धि और बढ़ते द्वेष की संस्कृति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकारों को शांति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शुरू करने का आह्वान किया। पूर्व कृष्णा विश्वविद्यालय के उपकुलपति एस. रामकृष्ण राव ने कहा कि हिंसा कभी भी उचित नहीं हो सकती, और सभी स्तरों—सरकार, वैज्ञानिक, नागरिक—को मिलकर शांति निर्माण में योगदान देना चाहिए।
पूर्व आंध्र विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर के. रवि और कंसर्न्ड इंडिया ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी पी.के. जोसे ने भी सभा को संबोधित किया, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के महत्व को रेखांकित किया।
भविष्य की योजना और सामाजिक प्रभाव
बैठक में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने शांति को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया। निकट भविष्य में समुद्र तट पर शांति मार्च आयोजित करने की घोषणा की गई, जिससे स्थानीय समुदाय में शांति संदेश का प्रसार होगा। इस पहल को शैक्षणिक संस्थानों, NGOs और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से साकार करने की योजना है।
ऐतिहासिक संदर्भ और संभावित प्रभाव
गांधी सेंटर का चयन स्वयं भारत की शांति विरासत को मान्यता देता है, जबकि विज़ाखापट्टनम का समुद्री किनारा अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के लिए एक प्रतीकात्मक स्थान बन सकता है। यदि इस तरह की पहल नियमित रूप से आयोजित की जाए, तो यह न केवल स्थानीय सामाजिक संरचना को सुदृढ़ करेगी, बल्कि वैश्विक शांति वार्तालाप में भारत की आवाज़ को भी मजबूत करेगी।