इज़राइल की संसद ने दो विधायिकाएँ पारित कीं, जो अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स पुरुषों को मिलिटरी सेवा से मुक्त करती हैं और धार्मिक अध्ययन को राज्य का मूलभूत मूल्य घोषित करती हैं। यह कदम प्रधानमंत्री बेन्ज़ामिन नेतेन्याहू की गठबंधन को शरद ऋतु में होने वाले चुनाव से पहले स्थिर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • इज़राइल ने अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स ड्राफ्ट छूट को कानूनी रूप से स्थगित किया
  • कानून ने धार्मिक अध्ययन को राज्य का मूलभूत मूल्य घोषित किया
  • नेतेन्याहू की गठबंधन को चुनाव से पहले मजबूत करने की रणनीति

इज़राइल के केनेसैट ने दो महत्वपूर्ण विधायिकाएँ पारित कीं, जो अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स समुदाय के पुरुषों को मिलिटरी सेवा से मुक्त करने की प्रक्रिया को रोक देती हैं और यहूदियों के धार्मिक अध्ययन को "राज्य का मूलभूत मूल्य" घोषित करती हैं। विधायिकाएँ सोमवार‑मंगलवार को चलाए गए निरंतर सत्र में पारित हुईं, जबकि देश ने लगभग तीन साल के निरंतर संघर्ष के कारण गंभीर मानव संसाधन कमी का सामना किया हुआ था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इज़राइल की आजादी के समय, 1948 में, कुछ युवा छात्रों ने होलोकॉस्ट के बाद क्षीण हुई यहूदी शास्त्र शिक्षा को पुनर्जीवित करने की इच्छा रखी। इस कारण से एक विशेष छूट दी गई, जिससे वे मिलिटरी सेवा से मुक्त रह सकें और केवल तोराह अध्ययन में लगे रहें। 1990 के दशक में इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट ने इस छूट को असंवैधानिक घोषित किया, लेकिन सरकार ने बाद में इसे अनौपचारिक रूप से जारी रखा।

वर्तमान राजनीतिक माहौल

नेतेन्याहू के लिकुड पार्टी को आगामी शरद ऋतु में 27 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में अपना समर्थन सुनिश्चित करना है। अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स समुदाय के समर्थन को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया, क्योंकि इस समूह का वोटर ब्लॉक इज़राइल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस विधि को पारित करने के बाद, कई आलोचकों ने इसे "इज़राइल के सैनिकों के प्रति अपमान" कहा, जबकि समर्थन करने वाले इसे राष्ट्रीय पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के रूप में देखते हैं।

सैन्य और सामाजिक प्रभाव

इज़राइल की सेना को पहले से ही 3 साल के संघर्ष के कारण गंभीर भर्ती कमी का सामना करना पड़ रहा है। सैन्य प्रमुख एयाल ज़ामिर ने इस विधि को "स्पष्ट रूप से मिलिटरी आवश्यकताओं के विरुद्ध" कहा और लिखा कि यह "बिना वैध कारण के बड़े पैमाने पर छूट" प्रदान करने जैसा है। यदि इस छूट को स्थायी किया गया, तो मिलिटरी की कार्यशक्ति पर दीर्घकालिक दबाव बढ़ सकता है, जिससे सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है।

भविष्य के संभावित परिणाम

अगले महीने के चुनाव में नेतेन्याहू की जीत या हार सीधे इस विधि के भविष्य को तय करेगी। यदि विपक्षी दलों को सरकार बनाते देखा गया, तो संभव है कि इस छूट को फिर से संशोधित या समाप्त किया जाए, जिससे अल्ट्रा‑ऑर्थोडॉक्स और लिकुड के बीच गठबंधन टूट सकता है। दूसरी ओर, यदि नेतेन्याहू पुनः सत्ता में आए, तो यह कानूनी ढांचा और भी व्यापक हो सकता है, जिससे इज़राइल के सामाजिक-धार्मिक संतुलन में नया परिवर्तन आ सकता है।