लिथुआनिया के नए प्रधानमंत्री मिंडाउगास सिंकेवियस ने चीन के साथ संबंधों को सुधारने के संकेत देते हुए कहा कि ताइवान को प्रतिनिधि कार्यालय देने का फैसला 'अत्यधिक साहसी' हो सकता था।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नए लिथुआनियाई PM मिंडाउगास सिंकेवियस ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने का लक्ष्य रखा है।
  • 2021 में ताइवान को प्रतिनिधि कार्यालय की अनुमति देने से चीन ने लिथुआनिया के साथ आर्थिक और राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे।
  • सरकार का नया घोषणापत्र दोनों देशों के बीच राजदूतों की नियुक्ति के माध्यम से संबंधों को बहाल करने की योजना बना रहा है।
  • ताइवान ने स्पष्ट किया है कि उनके और लिथुआनिया के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष के दबाव से प्रभावित नहीं होगा।

विल्नियस: लिथुआनिया के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मिंडाउगास सिंकेवियस (Mindaugas Sinkevicius) ने अपने कार्यकाल के पहले ही दिन एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत दिया है। संसद में संबोधन के दौरान, उन्होंने 2021 में ताइवान को देश में अपना 'डी-फैक्टो' (वास्तविक) दूतावास खोलने की अनुमति देने के निर्णय को 'शायद बहुत साहसी' (maybe too brave) करार दिया। सिंकेवियस का यह बयान चीन के साथ बिगड़े हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की उनकी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चीन का दबाव

विवाद की जड़ 2021 में शुरू हुई थी, जब यूरोपीय संघ और नाटो सदस्य राष्ट्र लिथुआनिया ने ताइवान को एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की अनुमति दी थी। बीजिंग ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन माना और तुरंत लिथुआनिया के साथ अपने राजनयिक संबंधों को घटा दिया। इस घटनाक्रम का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चीन ने लिथुआनियाई उत्पादों, विशेष रूप से डेयरी और बीफ पर प्रतिबंध लगाकर आर्थिक युद्ध छेड़ दिया। इस आर्थिक दबाव के कारण यूरोपीय संघ को हस्तक्षेप करना पड़ा और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में मामला भी पहुंचा।

राजनयिक सामान्यीकरण की राह

सिंकेवियस के नेतृत्व वाली नई सरकार के घोषणापत्र में चीन के साथ संबंधों को 'सामान्य' करने का स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है। इसमें दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजदूतों की नियुक्ति करना शामिल है, ताकि लिथुआनिया के संबंध यूरोप के अन्य देशों के स्तर पर वापस आ सकें। प्रधानमंत्री ने कहा, "हम पुराने जैसा संबंध चाहते हैं। हमारे चीन के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक निर्णय—जो शायद बहुत साहसी थे—इस संदर्भ से अलग थे।"

ताइवान की प्रतिक्रिया और भविष्य की चुनौतियां

दूसरी ओर, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ताइवान और लिथुआनिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग किसी भी 'तीसरे पक्ष' के प्रभाव से मुक्त रहेगा। ताइवान ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, सिंकेवियस ने विश्वास जताया है कि ताइवान के प्रतिनिधित्व में बदलाव किए बिना भी चीन के साथ संबंधों को सुधारा जा सकता है। अब चुनौती यह है कि लिथुआनिया अपनी सुरक्षा चिंताओं (रूस के खिलाफ रक्षा खर्च और अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति) और चीन के साथ आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाता है।