स्लोवाक राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड रासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजी गई बिहार की पारंपरिक मिठाई थेकुआ को चखा और इसे अपनी बिस्किट से तुलना की। इस छोटे‑से सांस्कृतिक उपहार ने दो देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मोदी ने स्लोवाकिया की यात्रा में बिहार की थेकुआ उपहार में दी
- रिचर्ड रासी ने इसे स्लोवाक बिस्किट से तुलना की
- भोजन के माध्यम से सांस्कृतिक कूटनीति को नया आयाम मिला
नई दिल्ली (15 जुलाई 2026) – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में स्लोवाकिया का दौरा किया, जहाँ उन्होंने भारतीय संस्कृति का प्रतीक एक लकड़ी के सजावटी बक्से में रखी थेहुआ (बिहार की पारम्परिक मिठाई) को उपहार स्वरूप स्लोवाक राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड रासी को दिया। इस उपहार को लेकर रासी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) खाते पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह बक्से को खोलते हुए मिठाई का स्वाद ले रहे हैं।
थेहुआ: बिहार की मिठाई का इतिहास
थेहुआ का उद्गम बिहार में है और यह मुख्यतः छठ पूजा के दौरान तैयार की जाती है। गेहूँ का आटा, गुड़ या चीनी और घी मिलाकर तैयार किया गया यह गहरा‑भुना स्नैक अपनी कुरकुरी बनावट और जटिल डिज़ाइन के कारण प्रसिद्ध है। प्रत्येक टुकड़े पर नक्काशीदार पैटर्न दबा रहता है, जो इसे एक दृश्य‑सौंदर्य भी प्रदान करता है।
स्लोवाकिया‑भारत कूटनीति में सांस्कृतिक पहल
रिचर्ड रासी ने वीडियो में कहा कि थेहुआ का स्वाद “जैसे ही मेरे मुँह में गया, वह तुरंत मेरी स्लोवाक बिस्किट की याद दिला गया”। उन्होंने इस तुलना को कूटनीतिक शब्दों में बदलते हुए कहा, “डिप्लोमेसी केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं, बल्कि छोटी‑छोटी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से भी गहरा बंधन बनता है।” यह टिप्पणी दो देशों के बीच बढ़ते व्यापार, प्रौद्योगिकी और शैक्षिक सहयोग को एक मानवीय पहलू प्रदान करती है।
परस्पर उपहार: दो‑तरफ़ा सांस्कृतिक विनिमय
रासी ने यह भी उजागर किया कि उन्होंने मोदी को “हिंदी में लिखे स्लोवाक स्पा वेफ़र्स” उपहार में लौटाए। इस प्रकार का द्विपक्षीय विनिमय, जहाँ दोनों पक्ष अपने‑अपने स्थानीय स्नैक्स को साझा करते हैं, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ‘सॉफ्ट पावर’ के प्रयोग को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे‑छोटे इशारे सार्वजनिक राय को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं और भविष्य में अधिक आर्थिक व तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
स्लोवाकिया‑भारत संबंधों में इस प्रकार की सांस्कृतिक संवाद की बढ़ती महत्ता को देखते हुए, दोनों देशों के व्यापारिक मिशनों और शैक्षिक आदान‑प्रदान कार्यक्रमों में भी इस पहल को शामिल करने की संभावना है। साथ ही, यह घटना दोनों देशों के नागरिकों के बीच पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकती है, क्योंकि मिठाइयों जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों के माध्यम से लोगों को नई संस्कृति से परिचित कराया जाता है।