वायलिन उस्ताद ए. कन्याकुमारी द्वारा शुरू की गई एक साल लंबी 'एकैका राग कृतियों' की अनूठी संगीत श्रृंखला का दिल्ली पी. सुंदरराजन के शानदार गायन के साथ समापन हुआ।
मुख्य बातें
- वायलिन उस्ताद ए. कन्याकुमारी द्वारा क्यूरेट की गई एक साल की संगीत यात्रा समाप्त हुई।
- दिल्ली पी. सुंदरराजन ने अंतिम 13वें कार्यक्रम में त्यागराज की दुर्लभ कृतियों का गायन किया।
- इस श्रृंखला ने लगभग 100 एकल राग कृतियों को प्रस्तुत कर संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
वायलिन उस्ताद ए. कन्याकुमारी द्वारा पिछले जून में शुरू की गई 'त्यागराज की एकैका राग कृतियों' (Ekaika Raga Kritis of Tyagaraja) की महत्वाकांक्षी मासिक संगीत श्रृंखला का भव्य समापन हो गया है। अर्के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस अंतिम 13वें कार्यक्रम में प्रख्यात गायक दिल्ली पी. सुंदरराजन ने अपनी कला का जादू बिखेरा।
इस श्रृंखला की सबसे बड़ी चुनौती संगीत के भंडार का धीरे-धीरे कम होना था। पिछले 12 महीनों में लगभग 100 ऐसी कृतियाँ प्रस्तुत की जा चुकी थीं जो किसी एक विशिष्ट राग पर आधारित थीं। इस सीमित चयन के बावजूद, सुंदरराजन ने नवीनता के बजाय व्याख्या की गहराई पर ध्यान केंद्रित किया। उनके साथ एम.ए. सुंदरेश्वरन (वायलिन), तिरुवरुर वैद्यनाथन (मृदंगम) और के.वी. गोपालकृष्णन (कंजीरा) ने बेहतरीन संगत प्रदान की।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस तरह की क्यूरेटेड संगीत श्रृंखलाएं शास्त्रीय संगीत के लुप्त होते स्वरूपों को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एक ही राग पर आधारित कृतियों का ऐसा व्यवस्थित अध्ययन संगीत के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक अमूल्य संपत्ति है।
संगीत की गहराई केवल नए गीतों को खोजने में नहीं, बल्कि ज्ञात गीतों की नई व्याख्या करने में निहित है।
सुंदरराजन ने 'सालागभैरवी' में 'पदवी नि सद्भक्तियु' से शुरुआत की और 'भुषावली' राग में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने 'तनामिदने' जैसी रचनाओं के माध्यम से त्यागराज के भक्ति भाव को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान 'सुवरभूषण' और 'सुभपंतुवरली' जैसे दुर्लभ रागों का प्रस्तुतीकरण श्रोताओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव रहा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
त्यागराज, जिन्हें कर्नाटक संगीत के त्रिमूर्ति में से एक माना जाता है, ने हजारों कृतियाँ रचीं। उनकी 'एकैका राग' कृतियाँ वे हैं जो किसी एक विशिष्ट राग की सुंदरता को निखारने के लिए जानी जाती हैं। कन्याकुमारी की यह पहल इन दुर्लभ रचनाओं को आधुनिक मंच पर लाने का एक सराहनीय प्रयास रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 'एकैका राग' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है ऐसी रचनाएँ जो केवल एक विशिष्ट राग की विशेषताओं को प्रदर्शित करती हैं।
2. इस श्रृंखला के क्यूरेटर कौन हैं?
इस विशेष संगीत श्रृंखला का क्यूरेशन प्रसिद्ध वायलिन वादक ए. कन्याकुमारी द्वारा किया गया था।