राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मंगलुरु कुकर ब्लास्ट के मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक की सजा बढ़ाने की मांग की है। एजेंसी ने 10 साल की मौजूदा सजा को उम्रकैद में बदलने का आग्रह किया है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मंगलुरु के चर्चित कुकर बम विस्फोट मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। एजेंसी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की है। गौरतलब है कि शारिक को पहले विशेष आतंकवाद न्यायालय द्वारा 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे अब बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

यह मामला 19 नवंबर, 2022 का है, जब मंगलुरु में एक ऑटो-रिक्शा के भीतर मोहम्मद शारिक द्वारा ले जाया जा रहा प्रेशर कुकर बम अचानक फट गया था। इस विस्फोट में शारिक स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गया था, और ऑटो चालक को भी काफी चोटें आई थीं। जांच में सामने आया कि शारिक ने इंटरनेट से सीखी गई 'डू-इट-योरसेल्फ' (DIY) तकनीकों का उपयोग करके इस बम को तैयार किया था। वह इस्लामिक स्टेट (IS) मॉड्यूल से प्रेरित था और सार्वजनिक स्थानों पर हमले की योजना बना रहा था।

गंभीर आरोप और कानूनी पेच

शारिक को यूएपीए (UAPA), 1967, भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं (हत्या का प्रयास, गंभीर चोट पहुँचाना और आपराधिक साजिश) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। विशेष न्यायालय ने अप्रैल 2026 में उसके अपराध स्वीकार करने के बाद सजा सुनाई थी। NIA का तर्क है कि अपराध की गंभीरता और आतंकवाद के खतरे को देखते हुए 10 साल की सजा अपर्याप्त है। एजेंसी ने पीड़ित ऑटो चालक के लिए मुआवजे की भी मांग की है।

आतंकवादी नेटवर्क का विस्तार

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शारिक का संबंध शिवमोग्गा स्थित एक IS मॉड्यूल से है, जिसका संबंध बेंगलुरु के चर्चित रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट से भी जोड़ा गया है। NIA के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित मोहम्मद शाहिद फैसल द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसे हाल ही में गृह मंत्रालय ने आतंकवादी घोषित किया है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे स्थानीय स्तर पर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है और विदेशी एजेंटों द्वारा उन्हें नियंत्रित किया जा रहा है।