भारतीय रेल ने लिनेन चोरी को रोकने के लिए बेडरोल अटेंडेंट को काउंसलिंग, सीसीटीवी निगरानी और कोच मित्र ऐप जैसी तकनीकी उपायों को अपनाया है। 2022‑2026 में 1.27 करोड़ वस्तुएँ चोरी हुईं, अब सख़्त दंड और आधुनिक ट्रैकिंग से स्थिति बदलने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 2022‑2026 में 1.27 करोड़ लिनेन वस्तुएँ चोरी हुईं
  • सीसीटीवी, कोच मित्र ऐप और काउंसलिंग से निगरानी सुदृढ़
  • ठेकेदारों एवं अटेंडेंट्स पर दंडात्मक कार्रवाई लागू

भारतीय रेलवे ने यात्रियों के व्यवहार को सुधारने और लिनेन चोरी को कम करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस योजना में बेडरोल अटेंडेंट को काउंसलिंग, कोच में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करना और ‘कोच मित्र’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से बोर्डिंग‑डिबोर्डिंग की रीयल‑टाइम ट्रैकिंग शामिल है। इन कदमों का लक्ष्य न केवल चोरी को रोकना बल्कि यात्रियों में अनुशासन की भावना भी जगाना है।

पृष्ठभूमि और आँकड़े

रिलायबिलिटी ट्रांसपेरेंसी इनफ़ॉर्मेशन (RTI) के जवाब में पता चला है कि 2022 से मई 2026 के बीच 54 डिवीज़नों के 16 ज़ोन में कुल 1.27 करोड़ लिनेन वस्तुएँ – बिस्तर, तौलिए, कंबल और तकिए – चोरी हो गईं। इन वस्तुओं की लागत ठेकेदार के बिल से वसूल की जाती है, जो आगे बेडरोल अटेंडेंट्स से वसूली करता है। यह आर्थिक बोझ न केवल रेलवे की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि यात्रियों के आराम पर भी असर डालता है।

मुख्य उपाय

सबसे पहले, बेडरोल अटेंडेंट्स को सतर्क रहने, लिनेन की निकासी पर नज़र रखने और समय पर संग्रह करने के लिए विस्तृत काउंसलिंग दी जा रही है। 2015 में रेलवे बोर्ड ने सभी ज़ोन के जनरल मैनेजर्स को निर्देश दिया था कि यात्रियों को डिबोर्डिंग से कम से कम 30 मिनट पहले प्रयुक्त लिनेन वापस सौंपने को कहा जाए। इसके साथ ही नियमित डिफ़ॉल्टरों की निगरानी, प्रशिक्षण और आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था भी की गई।

तकनीकी स्तर पर, कई डिवीजन ने कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं और ‘कोच मित्र’ ऐप का उपयोग शुरू किया है, जिससे अटेंडेंट्स को बोर्डिंग‑डिबोर्डिंग की सटीक जानकारी मिलती है और वे लिनेन के वितरण व संग्रह को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड कर सकते हैं। बिकानेर डिवीजन, जिसने सबसे अधिक चोरी की रिपोर्ट की, ने बताया कि इस ऐप ने चोरी के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट लाई है।

कानूनी और अनुशासनात्मक कदम

रेलवे प्रॉपर्टी (अवैध कब्ज़ा) अधिनियम के तहत लिनेन चोरी को गैर‑जमानती अपराध माना गया है। केंद्रीय रेलवे के भुसावल आरपीएफ ने कहा कि संदिग्ध यात्रियों की सामान की वैध खोज की जाएगी, साथ ही रात के ट्रेनों में पैट्रोलिंग और अचानक निरीक्षण भी बढ़ाए जाएंगे। कई डिवीजन ने ठेकेदारों के कर्मचारियों की पुलिस वेरिफिकेशन, प्रति कोच एक अटेंडेंट की नियुक्ति और नियमित संवेदनशीलता कार्यक्रमों को लागू किया है।

भविष्य की दिशा

इन उपायों के साथ, भारतीय रेलवे ने लिनेन चोरी को कम करने के लिए एक समग्र ढांचा तैयार किया है। निरंतर निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और सख़्त दंडात्मक कार्रवाई के संयोजन से यात्रियों के भरोसे को पुनर्स्थापित करने की उम्मीद है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो यह अन्य सार्वजनिक सेवाओं में भी लागू किया जा सकता है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा में एक नया मानक स्थापित होगा।