एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट ने रेड लीफ़ इमीग्रेशन सहित कई फर्मों को यूएस छात्र व वीज़ा धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप लगाया। आरोपियों ने नकली शैक्षणिक व वित्तीय दस्तावेज़ों के बदले आवेदकों से भारी रक़म ली।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ED ने रेड लीफ़ इमीग्रेशन, ओवरसीज पार्टनर और इन्फोविज़ पर चार्जशीट दायर की
  • धोखाधड़ी में नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र, फर्जी वित्तीय स्टेटमेंट और अस्थायी फंड ट्रांसफ़र शामिल थे
  • कुल अनुमानित आय ₹2.14 करोड़, सभी संपत्तियों को फ्रीज़ किया गया

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026 – भारत की एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने रेड लीफ़ इमीग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक विस्तृत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेन्ट दायर किया। यह मामला यूएस छात्र व विज़िटर वीज़ा प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयार किए गए नकली शैक्षणिक व वित्तीय दस्तावेज़ों पर आधारित है।

पृष्ठभूमि और जांच की शुरुआत

पंजाब और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई FIRs के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावास ने ED को सूचना दी कि भारतीय नागरिकों के वीज़ा आवेदन में दस्तावेज़ी जालबाज़ी की व्यापक योजना चल रही है। इन शिकायतों के आधार पर, ED ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोपियों को कई धाराओं में फंसाया।

धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली

जांच में उजागर हुआ कि अमंदीप सिंह और पूणम रानी द्वारा संचालित रेड लीफ़ इमीग्रेशन ने वीज़ा आवेदकों से लगभग ₹40,000 प्रति व्यक्ति लेकर नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कार्य अनुभव प्रमाणपत्र, तथा “गैप कवर” दस्तावेज़ तैयार करवाए। इसके साथ ही, ओवरसीज पार्टनर (अंकुर कुमार केहर) और रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज (नितिन विज) ने आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी रूप से ₹40 लाख तक की निधि जमा कर “फाइनेंशियल क्षमता” का झूठा प्रमाण दिया।

संपत्ति जप्ती और आर्थिक असर

फरवरी 2025 में किए गए तफ्तीश में ED ने डिजिटल डिवाइस, अनसुलझी डायरी, ₹19 लाख नकद और एक किलोग्राम सोने की बार जैसी वस्तुओं को जब्त किया। कुल मिलाकर, इस जाल से उत्पन्न आय लगभग ₹2.14 करोड़ निर्धारित की गई, जिसमें रेड लीफ़ इमीग्रेशन का हिस्सा ₹1.37 करोड़, ओवरसीज पार्टनर व रुद्र कंसल्टेंसी का ₹61.60 लाख, और इन्फ़ोविज़ का ₹15 लाख है। इन सभी संपत्तियों को अस्थायी रूप से फ्रीज़ किया गया है।

भविष्य की दिशा और संभावित प्रभाव

यह कार्रवाई न केवल भारतीय प्रवासियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वीज़ा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर चलने वाले धोखाधड़ी के नेटवर्क को तोड़ना भविष्य में वैध वीज़ा आवेदकों के लिए प्रक्रिया को सरल बना सकता है, साथ ही वित्तीय अपराधों के खिलाफ कड़ी निगरानी को सुदृढ़ करेगा।