केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण (ED) ने त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन एचडीएफसी बैंक खातों में जमा ₹440.42 करोड़ को रोक दिया है। यह कदम एआईटीसी के एविएशन कंपनियों को किए गए धन हस्तांतरण और विमान‑हेलिकॉप्टर खरीद के संदिग्ध लेन‑देनों के बाद उठाया गया।

केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण (ED) ने बुधवार को घोषणा की कि उसने त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन एचडीएफसी बैंक खातों में कुल ₹440.42 करोड़ की जमा राशि को पैसे की धुलाई रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1‑A) के तहत फ्रीज़ कर दिया है। यह कार्रवाई पाँच स्थानों पर किए गए तलाशी ऑपरेशन के बाद की गई, जो मुख्यतः कोलकाता के आसपास स्थित केयरवेल समूह की कंपनियों में हुई।

तलाशी का पृष्ठभूमि

ED ने बताया कि तलाशी के दौरान केयरवेल एवीएशन इंडिया प्रा. लि. और उसके संबद्ध इकाइयों के कार्यालयों से जुड़े कई दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डेटा बरामद हुए। जांच के प्रारम्भिक निष्कर्ष दर्शाते हैं कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच लगभग ₹160 करोड़ एआईटीसी के खातों से केयरवेल समूह को स्थानांतरित किए गए। इस रकम का अधिकांश भाग दो उच्च मूल्य के एविएशन उपकरण – एम्ब्रेर लेगेसी 600 जेट और अगुस्ता 109 ग्रैंडन्यू हेलिकॉप्टर – की खरीद में उपयोग हुआ।

विमान और हेलिकॉप्टर की खरीद‑विक्रय शृंखला

केयरवेल एवीएशन ने 2023‑2026 के बीच ₹82.96 करोड़ को एक नई स्थापित संबद्ध कंपनी को रूट किया, जिससे एम्ब्रेर लेगेसी 600 जेट और अगुस्ता 109 ग्रैंडन्यू हेलिकॉप्टर खरीदे गए। कुल मिलाकर इन दो उपकरणों की लागत लगभग ₹112 करोड़ रही। इसके अलावा, 2023 में कयमन द्वीप स्थित एक कंपनी से बिना सुरक्षा के $1.7 मिलियन का ऋण भी लिया गया, जिसका उपयोग हेलिकॉप्टर की खरीद के लिए किया गया।

वित्तीय लेन‑देनों की शंकाएँ

ED ने कहा कि इन विमानों को बाद में एआईटीसी ने स्वयं किराए पर लिया, जबकि खरीदारी एआईटीसी के कोष से ही की गई थी। इस प्रक्रिया में उपयोग शुल्क के रूप में बड़ी रकमें फिर से एआईटीसी के खातों में भेजी गईं, जिससे लेन‑देन की वास्तविक प्रयोजनता पर सवाल उठते हैं। जांचकर्ता यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह व्यवस्था पार्टी के वित्तीय संसाधनों को निजी लाभ के लिए मोड़ने के इरादे से की गई थी।

राजनीतिक एवं कानूनी प्रभाव

त्रिणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक ताकत है और आगामी विधानसभा चुनावों में इसका प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी रुचि का विषय है। इस प्रकार की वित्तीय जांचें न केवल पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि राज्य‑स्तर पर सत्ता संतुलन को भी बदल सकती हैं। यदि अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए जाते हैं, तो यह मामला पार्टी के भीतर वित्तीय पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

भविष्य की दिशा

ED ने इस मामले में आगे की सुनवाई और संभावित कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है। साथ ही, इस जांच से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेज़ों और लेन‑देन की विस्तृत रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी बढ़ रही है, जिससे नागरिकों को सच्चाई तक पहुँचने में मदद मिल सके।