तेलंगाना सरकार ने ग्राम पंचायत सतत कार्रवाई योजना (GP SAP) पर तीन‑दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। 1,478 पंचायतों के प्रतिनिधियों को ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं के सशक्तिकरण पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में प्रेरित किया गया।

हैदराबाद, 8 जुलाई 2026 – तेलंगाना राज्य सरकार ने बुधवार को ग्राम पंचायत सतत कार्रवाई योजना (GP SAP) के निर्माण हेतु एक त्रि‑दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल में 72 मंडलों के 1,478 ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंचायत सचिव, ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और इंजीनियरिंग स्टाफ ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और संरचना

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर दीर्घकालिक, संसाधन‑सुरक्षित और सामाजिक‑आर्थिक रूप से समावेशी विकास योजनाएँ तैयार करना है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर (स्थानीय निकाय) की देखरेख में आयोजित सत्रों में योजना‑निर्माण के चरण‑बद्ध तरीके, फंडिंग आवश्यकताओं की पहचान, और नागरिकों की भागीदारी को सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा हुई।

मुख्य वक्तव्य

पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री दनासारी अनसूया सीतकक्का ने महाबुबाबाद जिले के मुख्यालय में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, “एक सफल गाँव विकास योजना को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए; इसे ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों, भविष्य की माँगों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, रोजगार सृजन, बुनियादी ढाँचे, महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक प्रगति को समाहित करना चाहिए।” उन्होंने प्रतिभागियों से स्थानीय प्राथमिकताओं की पहचान, वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन और लोगों की राय को योजना में सम्मिलित करने का आग्रह किया।

स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन की उम्मीदें

सीतकक्का ने सरपंचों और अधिकारीयों को प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को तुरंत लागू करने की चेतावनी दी, यह कहते हुए कि “पारदर्शी शासन ही जनता का भरोसा बनाए रखेगा।” उन्होंने ग्रामीण विकास को सरकार और जनता दोनों के संयुक्त प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे सामाजिक सहभागिता और जवाबदेही दोनों में वृद्धि होगी।

भविष्य की दिशा

इस प्रशिक्षण के साथ, तेलंगाना सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास की नींव रखने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्राम पंचायतें स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग करती हैं और महिलाओं एवं युवा वर्ग को योजना‑निर्माण में शामिल करती हैं, तो आर्थिक वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों को बल मिलेगा। इस पहल का दीर्घकालिक प्रभाव यह होगा कि प्रत्येक गाँव अपनी विशिष्ट चुनौतियों के अनुरूप एक कार्य‑संचालन योजना तैयार कर सके, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास की रणनीति को नया आयाम मिलेगा।