अमीर जनता के मुद्दों को उठाते हुए अरविंद केजरीवाल ने NEET पेपर लीक, राम मंदिर चंदा चोरी और E20 पेट्रोल जैसे विषयों को अपनी नई राजनीतिक दौड़ का केंद्र बनाया है। 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में यह रणनीति क्या दर्शाती है?

अमृतसर के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने पार्टी, आम आदमी पार्टी (AAP), को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर दिखावा करने के लिये कई मुद्दों को चुना है। उनका संदेश विशेषकर जनरेशन Z और मध्यम वर्ग के युवाओं को लक्षित करता दिखता है, जहाँ वह इंस्टाग्राम‑शैली के छोटे वीडियो और तेज़ बयानों से जनता का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

NEET पेपर लीकेज से शुरू हुआ दावेदारी

2024 में जब नेशनल एलिट एग्ज़ाम (NEET‑UG) के प्रश्नपत्र में लीकेज की अफवाहें फैलीं, केजरीवाल ने तुरंत विरोधी नेता के रूप में मंच संभाला। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया क्लिप और छात्र संगठनों के साथ मिलकर एक व्यापक आंदोलन शुरू किया। यह पहल, हालांकि प्रारम्भिक रूप से एक अस्थायी प्रतिक्रिया लगती थी, ने AAP को युवा वर्ग में पुनः स्थापित करने का पहला कदम बन गया।

राम मंदिर ‘चंदा चोरी’ को राजनीतिक हथियार बनाना

जब आयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन‑देनों को लेकर ‘चंदा चोरी’ का विवाद उभरा, तो केजरीवाल ने इस मुद्दे को भी अपनी अगली बड़ी रणनीति के रूप में अपनाया। उन्होंने 26 जून को आयोध्या का दौरा किया, मौन‑संकल्प से लेकर मृत्युदंड की माँग तक, सभी कदमों को क्रमबद्ध रूप से पेश किया। इस क्रम में AAP सांसद संजय सिंह द्वारा दस्तावेज़ों की पेशकश, फिर केजरीवाल की दिल्ली में तीव्र सार्वजनिक बयानबाज़ी, और अंत में FIR दर्ज कराना शामिल था। यह क्रमिक कदम पार्टी को ‘भ्रष्टाचार विरुद्ध लड़ाई’ की छवि देने में मददगार साबित हुआ।

E20 पेट्रोल पर अभियान: नई ऊर्जा, नया विकल्प

जैसे ही युवा वर्ग में ईथेन‑ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) के प्रभाव को लेकर बढ़ती असंतुष्टि दिखी, केजरीवाल ने इसे अपनी अगली लक्ष्य बनाकर कहा कि वह 29 वाहन निर्माताओं को पत्र लिखेंगे। टॉयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियों को ई20 के प्रभाव के बारे में स्पष्टता माँगी गई। अगले हफ़्ते प्रधानमंत्री को भेजा जाने वाला पत्र सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा का केंद्र बन सकता है।

राजनीतिक कैलेंडर में व्यवस्थित परिवर्तन

केजरीवाल की हाल की यात्रा‑शेड्यूल—दिल्ली, पंजाब और गोवा—को अब एक रणनीतिक मानचित्र माना जा रहा है। दिल्ली में वह केंद्रीय सरकार के खिलाफ ईंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी मुद्दों को उजागर कर रहे हैं। पंजाब में, वह भगवंत मान सरकार के काम को AAP के मूल वोटरों तक पहुँचाने में मदद कर रहे हैं, जबकि गोवा और गुजरात में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार पर व्यक्तिगत निगरानी रख रहे हैं। इस प्रकार, 2025 के चुनावीय हार के बाद केजरीवाल का आत्मविश्वास और व्यवस्थितता, पार्टी के भविष्य की दिशा को पुनः निर्धारित कर रही है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि यह रणनीति सफल होती है, तो AAP 2027 के विधानसभा चुनावों में केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पंजाब, गोवा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी भाजपा के वर्चस्व को चुनौती दे सकता है। लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि केजरीवाल इन मुद्दों को कितनी कुशलता से जनता तक पहुंचा पाते हैं और क्या उनका संदेश ‘इश्यू‑बेस्ड’ राजनीति में बदल सकता है।