उप-चुनाव आयुक्त संजय कुमार ने मंड्या जिले में विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) 2026 को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी अधिकारीयों को मतदाता सूची में कोई भी पात्र मतदाता बाहर न रहने की तगारिश की।
दुर्लभ समय में राष्ट्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने मंड्या, कर्नाटक में विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) 2026 की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के लिए एक समीक्षा बैठक आयोजित की। उप-चुनाव आयुक्त संजय कुमार ने जिला चुनाव आयुक्त और सभी चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के साथ मिलकर इस महत्त्वपूर्ण कार्य की प्रगति का मूल्यांकन किया।
बैठक के मुख्य बिंदु
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि SIR का उद्देश्य मौजूदा मतदाता सूची को शुद्ध करना, नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना और अनुपयुक्त नामों को हटाना है। संजय कुमार ने सभी अधिकारियों को चुनाव आयोग के दिशा‑निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और साथ ही गैर‑पात्र मतदाताओं का समावेश न हो।
फील्ड‑लेवल चुनौतियों का समाधान
सभी विधानसभा क्षेत्रों के EROs के साथ बातचीत में, आयुक्त ने बूथ‑लेवल अधिकारी (BLO) सुविधा केंद्रों को आवश्यक बुनियादी ढाँचा और कंप्यूटरीकरण सुविधाओं से सुसज्जित करने का निर्देश दिया। यह कदम प्रक्रिया को तेज़ और त्रुटिहीन बनाने के लिए आवश्यक माना गया।
डिज़िटलीकरण के साथ-साथ, सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि ब्लो द्वारा प्रत्येक घर पर जाकर गणना फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं और नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज़ प्रदान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह व्यक्तिगत संपर्क मतदाता सूची की शुद्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व
विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) भारत में पहली बार 2019 में लागू किया गया था, जिसका लक्ष्य चुनावों से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए एक तीव्र, सीमित‑समय वाली प्रक्रिया प्रदान करना था। कर्नाटक में इस प्रक्रिया का सफल कार्यान्वयन पिछले कई चुनावों में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा स्थापित करने में मददगार सिद्ध हुआ है।
मंड्या में इस बार की SIR 2026 को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कई नई तकनीकी पहलें, जैसे मोबाइल‑आधारित डेटा एंट्री और रियल‑टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, लागू किए गए हैं। इन उपायों से न केवल प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि संभावित irregularities को भी जल्दी पहचाना जा सकेगा।
आगे की राह
संजय कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे अंतिम चरण में भी सतर्क रहें और किसी भी विसंगति को तुरंत रिपोर्ट करें। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता केवल चुनावी जीत‑हार से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ी है।