एनर्जी डिपार्टमेंट (ED) ने पंजाब के पूर्व मंत्री संजीव अरोरा के खिलाफ 103 करोड़ रुपये की नकली iPhone निर्यात स्कैम के लिए चार्जशीट दायर की। आरोप है कि उन्होंने दुबई को दिखाते हुए झूठे बिलों के माध्यम से धन शुद्ध किया और अपनी रियल्टी कंपनी के संपत्तियों को जप्त किया गया।
नई दिल्ली: आर्थिक अपराध शाखा (ED) ने पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोरा के खिलाफ 103 करोड़ रुपये की नकली iPhone निर्यात स्कैम के लिए विस्तृत चार्जशीट दायर की। यह आरोप है कि अरोरा ने दुबई को निर्यात दर्शाते हुए झूठे खरीद बिल और निर्यात दस्तावेज तैयार कर धन शोधन किया।
स्कैम का विस्तृत विवरण
जुड़ाव वाले दस्तावेज़ों के अनुसार, लगभग 150 करोड़ रुपये मूल्य के iPhone को दुबई स्थित एक कंपनी को निर्यात किया गया, जो अरोरा की रियल्टी फर्म हैम्प्टन स्काई रियल्टी लिमिटेड में निवेशक थी। इन निर्यातों में से 100 करोड़ रुपये को ‘नकली निर्यात रेमिटेंस’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि शेष 87 करोड़ रुपये को IGST और ड्यूटी रिफंड के माध्यम से शुद्ध किया गया।
जाँच की पृष्ठभूमि और संपत्ति जप्ती
अरोरा को 9 मई को ED ने हिरासत में ले लिया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। गुरुग्राम कोर्ट ने उनका जमानत अनुरोध खारिज कर दिया, जबकि पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील दायर है। जांच के दौरान अरोरा और उसकी फर्म से जुड़ी संपत्तियों में 55 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बैंक जमा, फिक्स्ड डिपॉज़िट, लुधियाना, गुरुग्राम और चंडीगढ़ में जमीन, वाणिज्यिक परिसर और आवासीय अपार्टमेंट शामिल हैं।
घोटाले के पीछे की संरचना
ED ने बताया कि इस ‘शाम निर्यात लेनदेन’ को काल्पनिक खरीददार, शैल (shell) कंपनियों और घुमा-फिरा कर धन प्रवाह के माध्यम से व्यवस्थित किया गया। दुबई की दो कंपनियों – फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और ड्रैगन ग्लोबल FZCO – को भी इस योजना में शामिल माना गया, जहाँ iPhone की कंसाइनीमेंट्स भेजी गईं और फिर भारत में अरोरा की फर्म को रेमिटेंस प्राप्त हुआ। कई शैल कंपनियों के पास समान फोन नंबर और ईमेल आईडी थी, जो एक समन्वित ऑपरेशन का संकेत देती है।
राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत भ्रष्टाचार स्कैम को उजागर करता है, बल्कि भारत में निर्यात-आधारित कर चोरी के बड़े पैमाने को भी सामने लाता है। AAP के प्रमुख नेता होने के नाते, अरोरा के खिलाफ यह कार्रवाई पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकती है, जबकि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस स्कैम को सफलतापूर्वक सजा मिलती है, तो यह अन्य राजनैतिक और व्यवसायिक वर्गों के लिए एक निवारक उदाहरण बन सकता है।