कर्नाटक के मिसूर जिले में अँगनवाड़ी कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया, जिसमें 15,000 अँगनवाड़ी कर्मचारियों और 10,000 हेल्परों के नियमितीकरण तथा LKG‑UKG कक्षाओं को अँगनवाड़ी केंद्रों में जोड़ने की माँग की गई। इन मांगों में पोषण ट्रैकर प्रणाली का बहिष्कार, डिजिटल सुविधाओं की पूर्ति और ग्रेच्युटी लाभ का कार्यान्वयन भी शामिल है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 15,000 अँगनवाड़ी कर्मचारियों एवं 10,000 हेल्परों का नियमितीकरण आवश्यक
  • LKG‑UKG को अँगनवाड़ी केंद्रों में प्री‑प्राइमरी शिक्षा के रूप में जोड़ना
  • पोशन ट्रैकर, फेस रीकॉग्निशन और e‑KYC जैसी अनिवार्य प्रणालियों का निरस्तीकरण

कर्नाटक राज्य के मिसूर जिले में 10 जुलाई को अँगनवाड़ी कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर धरना दिया, जिससे राज्य सरकार पर उनके कई वर्षों से लंबित माँगों को पूरा करने का दबाव बना। यह प्रदर्शन कर्नाटक राज्य अँगनवाड़ी कार्यकर्ता संघ (Karnataka State Anganwadi Workers’ Association) द्वारा ‘ब्लैक डे’ के रूप में घोषित किया गया था, जिसका उद्देश्य सरकार की अनदेखी को उजागर करना था।

मुख्य माँगें और उनका महत्व

प्रदर्शकों ने स्पष्ट रूप से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: 15,000 अँगनवाड़ी कर्मचारियों और 10,000 हेल्परों का नियमितीकरण, LKG‑UKG (प्राथमिक कक्षा) को अँगनवाड़ी केंद्रों में प्री‑प्राइमरी शिक्षा के रूप में शामिल करना, तथा पोषण ट्रैकर, फेस रीकॉग्निशन और e‑KYC जैसी अनिवार्य डिजिटल प्रणालियों को हटाना। इन माँगों का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों के कार्यस्थल सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, बल्कि 3‑6 वर्ष के बच्चों के प्रारंभिक विकास को भी सुदृढ़ करना है।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

अँगनवाड़ी योजना भारत में बाल पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के प्रमुख स्तंभों में से एक है। कर्नाटक में 2020 में इस योजना को ‘Early Childhood Care, Education and Development (ECCE)’ कार्यक्रम के तहत पुनः संरचित किया गया, परन्तु अभी तक कई अँगनवाड़ी केंद्रों में प्री‑प्राइमरी कक्षाएं स्थापित नहीं हुई हैं। राज्य सरकार ने मार्च 2023 में इस पर चर्चा की थी, परन्तु कार्यान्वयन में देरी और निधि आवंटन में अस्पष्टता ने कर्मचारियों को निराश किया है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यदि इन माँगों को पूरा किया गया तो 15,000 नियमित कर्मचारियों को स्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता बढ़ेगी। साथ ही, 10,000 अँगनवाड़ी केंद्रों में LKG‑UKG कक्षाओं की शुरुआत से 3‑6 वर्ष के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक आधार मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक शैक्षणिक परिणामों में सुधार की संभावना है।

भविष्य की संभावनाएँ

राज्य सरकार के लिए यह एक निर्णायक क्षण है: या तो वे अँगनवाड़ी कर्मचारियों की माँगों को स्वीकार कर एक समग्र सुधारात्मक योजना लागू करेंगे, या फिर सामाजिक असंतोष को बढ़ते देखेंगे, जिससे भविष्य में अधिक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो सकते हैं। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी बढ़ रहा है, जो कर्नाटक की सामाजिक-आर्थिक नीतियों पर व्यापक चर्चा को प्रेरित कर सकता है।