हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना सरकार से स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने का आग्रह किया, जिससे विशेष पुनःसमावेशन (SIR) प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं को शामिल किया जा सके। उन्होंने कर्नाटक की समान प्रक्रिया का हवाला देते हुए यह कदम गरीब वर्ग के हित में आवश्यक बताया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ओवैसी ने SIR में वास्तविक मतदाताओं को शामिल करने के लिए PRC जारी करने की मांग की।
  • कर्नाटक ने 2011 के सत्कार सेवाएँ अधिनियम के तहत PRC जारी किया, तेलंगाना भी ऐसा कर सकता है।
  • सरकार के पास कई डेटाबेस हैं जो प्रमाणपत्र के निर्गमन को समर्थन दे सकते हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने 10 जुलाई को तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू से मुलाकात की और विशेष पुनःसमावेशन (SIR) प्रक्रिया में मतदाता सूची को सुधारने के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) या परिवार पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने का आग्रह दोहराया। यह मांग कई वर्ष से चल रहे मतदाता पुनरावलोकन को सरल बनाने और वास्तविक नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित होने से रोकने के उद्देश्य से की गई है।

कर्नाटक मॉडल का हवाला

ओवैसी ने कर्नाटक के उदाहरण को उजागर किया, जहाँ राज्य ने Karnataka Sakala Services Act, 2011 के तहत सरकारी आदेश द्वारा PRC जारी किए हैं। इस मॉडल ने साक्ष्य‑आधारित पहचान प्रक्रिया को तेज़ किया और कई क्षेत्रों में मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाई। ओवैसी ने कहा कि तेलंगाना भी इसी तरह के कदम उठाकर गरीब वर्ग के लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों से बचा सकता है।

संवैधानिक और विधायी आधार

ओवैसी ने यह भी बताया कि यदि सरकार चाहे तो संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने मुख्य मंत्री अ. रेवंत रेड्डी से इस सुझाव को अपनाने का आग्रह किया, जिससे अंतिम SIR मतदाता सूची में सभी वास्तविक मतदाताओं को शामिल किया जा सके।

डेटाबेस और तकनीकी संसाधन

तेलंगाना सरकार के पास पहले से ही कई व्यापक डेटाबेस उपलब्ध हैं, जैसे कि समग्र कुटुंब सर्वेक्षण, 2024‑2025 की सामाजिक‑आर्थिक एवं जाति सर्वेक्षण, Bhu Bharati Act, 2025 के तहत रखी गई भूमि रिकॉर्ड, खाद्य सुरक्षा कार्ड डेटा, नगरपालिका कर रिकॉर्ड, और विद्यालय एवं बोर्ड रिकॉर्ड। ये सभी डेटा PRC जारी करने के लिए विश्वसनीय आधार प्रदान कर सकते हैं।

भविष्य की दिशा

यदि तेलंगाना में PRC जारी करने की प्रक्रिया को अपनाया जाता है, तो यह न केवल मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाएगा, बल्कि सामाजिक समावेशन को भी सुदृढ़ करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास पुनःस्थापित होगा।