राष्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 20 जुलाई को जंतर मंचर में राज्यता बहाल करने के लिए 52 नेताओं को बुलाया। मिर्वाज़ उमर फारूक ने इस आंदोलन में अनुच्छेद 370, 35A और क़ैदी रिहाई को भी शामिल करने की माँग की, जबकि बीजेडपी ने एनसी को 2010 के दमन में जिम्मेदार ठहराते हुए आमंत्रण को ठुकरा दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • फारूक अब्दुल्ला ने 52 राष्ट्रीय‑क्षेत्रीय नेताओं को जंतर मंचर में 20 जुलाई को राज्यता बहाल करने के लिए आमंत्रित किया।
  • मिर्वाज़ उमर फारूक ने आंदोलन के एजेंडे में अनुच्छेद 370, 35A का पुनर्स्थापन और कश्मीरियों के राजनीतिक क़ैदी रिहाई की माँग की।
  • बीजेडपी ने एनसी को 2010 के दमन में जिम्मेदार ठहराते हुए आमंत्रण को खारिज कर दिया।

सिंधु घाटी के राजनीतिक इतिहास में 20 जुलाई का दिन अब फिर से चर्चा में आया है, जब राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 52 प्रमुख राष्ट्रीय‑क्षेत्रीय नेताओं को जंतर मंचर में एक शांति‑पूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए लिखित निमंत्रण भेजा। यह आंदोलन 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त कर जम्मू‑कश्मीर को दो संघीय क्षेत्रों में विभाजित करने के बाद राज्यता की पुनर्स्थापना की माँग पर केंद्रित है।

मिर्वाज़ की विस्तारित माँगें

सिन्धा में जमिया मस्जिद में आयोजित एक सभा में मिर्वाज़ उमर फारूक ने कहा कि इस विरोध को केवल राज्यता की वापसी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35A के पुनर्स्थापन, देश‑व्यापी जेलों में बंद कश्मीरी राजनीतिक कैदियों की रिहाई, तथा कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान की माँग को एजेंडा में जोड़ने का आग्रह किया। यह बयान मिर्वाज़ की व्यापक राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पक्ष में उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बीजेडपी का कड़ा विरोध

विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेडपी) ने इस आमंत्रण को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और एनसी को 2010 के दंगों में हुई गोलीबारी के लिए जिम्मेदार ठहराया। बीजेडपी के नेता सुनिल शर्मा ने कहा, “एनसी ने उन युवा जीवनों को समाप्त किया जो टुफ़ैल मातू और वमीक फारूक जैसे किशोरों की मौत का कारण बने। ऐसे दल के साथ हम नहीं चल सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि एनसी के “कोकराच पार्टी” जैसी उपनाम वाले नेताओं का कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वे दिल्ली में प्रदर्शन के लिए अन्य दलों को आमंत्रित करें।

परमिट की प्रतीक्षा और राजनीतिक तनाव

जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने बताया कि एनसी अभी भी जंतर मंचर में अपने प्रदर्शन के लिए अनुमति की प्रतीक्षा कर रहा है, जबकि “कोकराच पार्टी” को केवल 24 घंटे में अनुमति मिल गई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विरोधी दलों द्वारा कार्यक्रम की तिथियों को बदलकर विरोधी प्रदर्शन को उसी दिन आयोजित करने की कोशिश की जा रही है, जिससे सुरक्षा और व्यवस्था के सवाल उठ रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि एनसी को अनुमति मिलती है, तो यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू‑कश्मीर की राज्यता बहाली की मांग को फिर से उजागर करेगा और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, बीजेडपी की कड़ी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि केंद्र के प्रमुख दल इस मुद्दे को अपनी विकासवादी नीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, लेकिन साथ ही 2010 के दंगों के स्मरण को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इस जटिल समीकरण में मिर्वाज़ की विस्तारित माँगे और एनसी की अनुमति की अनिश्चितता दोनों ही प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकती हैं।