तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने करूर में हुए 41 हताहतों के बाद पहली बार जिला का दौरा किया, शोक व्यक्त किया और परिवारों को सरकारी नौकरियों का वादा किया। यह यात्रा उनके संकट प्रबंधन और राजनीतिक भरोसे को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • करूर में 41 मौतें और 110 घायल
  • परिवारों को सरकारी नौकरियों की पेशकश
  • विजय का पुनः दौरा राजनीतिक भरोसे को पुनर्स्थापित करता है

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने लगभग एक साल बाद करूर जिला का दौरा किया, जहाँ 21 सितंबर 2025 को उनके चुनावी रैली में भीड़भाड़ के कारण 41 लोगों की मौत हुई थी। इस यात्रा में उन्होंने काली पोशाक पहनकर अपने शोक को व्यक्त किया और शहीद परिवारों को सहानुभूति पत्र प्रदान किए।

घटना का पृष्ठभूमि

विजय के तमिलगा वैट्री कज़हागम (TVK) ने करूर में अनुमानित 15,000 लोगों की भीड़ का अनुमान लगाया था, जबकि वास्तविक उपस्थितियों की संख्या 20,000 से अधिक हो गई। रैली में देर से पहुँचने के कारण भीड़ में जलवायु तनाव और पानी की कमी ने भीड़ को अस्थिर कर दिया, जिससे कई संरचनाएँ ढह गईं और घबराहट में भीड़ धधक गई।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और आलोचना

रिपोर्टों ने बताया कि रैली के आयोजकों ने पानी, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा उपायों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की। तमिलनाडु के कई राजनेता और विश्लेषकों ने इसे “खराब योजना” और “संकट प्रबंधन में विफलता” कहा। विशेषकर, चेन्नई के राजनीतिक विश्लेषक रामु मनिवनन ने कहा, “एक फिल्म स्टार का राजनीतिक मंच पर प्रभाव अस्थायी हो सकता है, पर वास्तविक नेतृत्व में जनता की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।”

विजय की प्रतिक्रिया और पुनर्स्थापना

आरोपों के बावजूद, विजय ने सामाजिक मीडिया पर शोक संदेश जारी किया, 20 लाख रुपये की मुआवजा राशि मृतकों के परिवारों को और 2 लाख रुपये घायल लोगों को देने का वचन दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने करूर में सरकारी नौकरियों के लिए 32 परिवारों को “सहानुभूति नियुक्ति” का प्रस्ताव रखा, जिससे स्थानीय जनता में आशा की भावना बनी।

भविष्य की दिशा

करूर में नई निवेश परियोजनाओं की घोषणा और रोजगार सृजन से यह संकेत मिलता है कि विजय इस त्रासदी को विकास के अवसर में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। यह कदम न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी छवि को भी पुनः स्थापित करेगा।