कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेंगोपाल ने आयोध्या राम मंदिर में दान की ग़लत इस्तेमाल को उजागर कर, सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में एक विशेष जांच की मांग की है। उन्होंने यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी को ‘धोखा’ करार दिया और भाजपा‑शासन पर दबाव डाला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • के.सी. वेंगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में जांच की मांग की
  • एसआईटी को धोखा मानते हुए उसे ‘फरास’ कहा
  • भाजपा‑शासन पर दान घोटाले को छिपाने का आरोप

केरल के कांग्रेस नेता के.सी. वेंगोपाल ने 11 जुलाई को त्रिशूर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की पूरी सच्चाई उजागर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में एक विशेष जांच (ज्यूरिडिकल इन्वेस्टिगेशन) की मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान में चल रही विशेष जांच टीम (SIT) की जांच ‘फरास’ है और यह वास्तविक दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने में असफल रही है।

पृष्ठभूमि और मौजूदा जांच

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2024 में राम मंदिर के दान के संदिग्ध उपयोग को लेकर एक SIT गठित की थी। वेंगोपाल ने कहा कि इस टीम का काम केवल दिखावा है, क्योंकि उन्होंने देखा है कि ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारियों को इस घोटाले की जानकारी थी, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर हटाया गया और सुरक्षा कर्मियों की चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया।

भाजपा‑शासन पर आरोप

वर्तमान में केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों में भाजपा‑शासन है। वेंगोपाल ने प्रश्न किया कि यदि सरकार के पास कुछ छुपाने को नहीं है तो वह सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में जांच को क्यों नहीं मानता। उन्होंने कहा, “अगर कुछ नहीं छुपा रहे हैं, तो इस मुद्दे को खुला करके दिखाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के घोटाले सिर्फ आयोध्या तक सीमित नहीं हैं; बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में भी समान भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जो भाजपा के धार्मिक राजनीति को उजागर करते हैं।

संसदीय कार्रवाई की तैयारी

विचार-विमर्श के बाद, कांग्रेस ने 20 जुलाई को शुरू होने वाले संसद सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने का इरादा किया है। वे प्रधानमंत्री से इस मामले का स्पष्ट जवाब देने की मांग करेंगे। इस कदम का उद्देश्य न केवल दान के दुरुपयोग को रोकना, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना भी है।

संभावित परिणाम और भविष्य की दिशा

यदि सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में जांच शुरू होती है, तो यह न केवल आयोध्या मंदिर के दान के प्रवाह को साफ़ करेगा, बल्कि देश भर में धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक चर्चा को भी जन्म देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च-स्तरीय जांच से भविष्य में दान के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियमन और निगरानी तंत्र स्थापित हो सकते हैं।