अंध्र प्रदेश सरकार ने 152.95 करोड़ रुपये की लागत वाले सर आर्थर कॉटन बैराज़ के 117 गेटों के नवीनीकरण कार्य को 13 जुलाई से शुरू किया। इस परियोजना का समापन जुलाई 2028 तक होने की उम्मीद है, जबकि 2014‑15 में 58 गेटों का प्रतिस्थापन किया जा चुका है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 117 गेटों का नवीनीकरण 13 जुलाई को शुरू
- कुल लागत — ₹152.95 करोड़, 2028 में पूरा
- पहले 2014‑15 में 58 गेटों का प्रतिस्थापन
अंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नंदन चंद्रबाबू नायडु ने पिचुका लंका, डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर कोनसेमा जिले में सर आर्थर कॉटन बैराज़ के गेट नंबर 1 पर भू‑पूजा करके 117 गेटों के बदलने का आधिकारिक काम शुरू किया। यह कार्य डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल और सेंट्रल वाटर कमिशन की सिफ़ारिश के अनुसार किया जा रहा है।
परियोजना का पृष्ठभूमि
1852 में ब्रिटिश जल अभियंता सर आर्थर कॉटन द्वारा डिजाइन किया गया यह 5.837 किमी लंबा बैराज़, गोदावरी डेल्टा के दो हिस्सों—डाउलेस्वरम और विज्ज़ेस्वरम—को जोड़ता है और 10 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई जल प्रदान करता है। 1969 में मौजूदा बैराज़ का निर्माण किया गया, लेकिन समय के साथ ढलान और गेटों में क्षति ने सुरक्षा जोखिम बढ़ा दिया।
वित्तीय और तकनीकी पहलू
राज्य सरकार ने 2025 में इस नवीनीकरण के लिए आधिकारिक स्वीकृति दी, जबकि कुल बजट ₹152.95 करोड़ निर्धारित किया गया। 2014‑15 वित्तीय वर्ष में ही 58 गेटों का प्रतिस्थापन ₹31.77 करोड़ में पूरा हो चुका था। कार्य को हाइडराबाद स्थित बीईकेएम इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. को सौंपा गया है, जो 2028 तक पूर्णता की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
कृषक सहभागिता और सामाजिक पहल
भू‑पूजा के बाद, मुख्यमंत्री नायडु गोदावरी डेल्टा के किसानों के साथ संवाद करेंगे, जिससे जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और स्थानीय जीवन स्तर पर सकारात्मक प्रभाव की आशा है। साथ ही, बैराज़ पर मछुआरों के अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने हेतु संयुक्त कलेक्टर्स ने दो दौर की बातचीत की है, जिससे सामाजिक स्थिरता भी सुनिश्चित हो सके।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि यह नवीनीकरण योजना समय पर पूरी हो जाती है, तो यह न केवल जल सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि जल‑संकट के समय में आपातकालीन जल निकासी की क्षमता भी बढ़ाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बुनियादी ढाँचा सुधार परियोजनाएँ जल‑संसाधन प्रबंधन में भारत के लिए एक मॉडल बन सकती हैं, जिससे अन्य राज्यों में भी समान पहल को प्रेरणा मिल सकती है।