केरल के राजस्व विभाग ने अरनमुला हवाईअड्डा परियोजना स्थल पर निजी व्यक्ति द्वारा किए गए ड्रोन सर्वे की जांच का आदेश दिया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले को 16 जुलाई को सुनने वाले केरल हाई कोर्ट को प्रस्तुत किया जाएगा, और आगे कोई सर्वे अनुमत नहीं होगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट केरल राजस्व विभाग को भेजी गई।
  • अवैध सर्वे की जांच के साथ केस हाई कोर्ट में 16 जुलाई को सुना जाएगा।
  • साइट पर आगे कोई ड्रोन सर्वे अनुमति नहीं होगी।

केरल के राजस्व विभाग ने अरनमुला हवाईअड्डा परियोजना स्थल पर हुए ड्रोन सर्वे के संबंध में मीडिया रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट का आदेश दिया है। पाथनमथिट्टा के जिला कलेक्टर ए. निजामुदीन ने बताया कि तहसीलदार और संबंधित ग्राम अधिकारी से इस घटना की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। विभाग को इस सर्वे के बारे में केवल मीडिया रिपोर्ट और एक निजी व्यक्ति के दावे ही उपलब्ध हैं, इसलिए वह परिस्थितियों की पुष्टि करना चाहता है।

अरनमुला हवाईअड्डा परियोजना का इतिहास

यह 232 एकड़ की जमीन, जो अरनमुला, मल्लापुझ़हस्सेरी और किदंगनुर गांवों में फैली थी, मूल रूप से 2004 में एक निजी उड्डयन प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित थी। वि.एस. अचुथानंदन सरकार के तहत इसे प्रारम्भिक मंजूरी मिली थी, पर 2011 में ओमेन चंडी सरकार ने इस क्षेत्र को औद्योगिक ज़ोन घोषित कर दिया। 2014 में राष्ट्रीय हरित न्यायालय ने पर्यावरणीय मंजूरी को रद्द कर दिया, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा। इस कारण परियोजना ठहरी हुई है और भूमि को जुलाई 2017 में अधिशेष भूमि के रूप में घोषित किया गया।

ड्रोन सर्वे विवाद

जुलाई 10, 2026 को अब्राहम कालमनिल नामक व्यक्ति ने दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम के साथ इस क्षेत्र का ड्रोन सर्वे किया। उन्होंने मीडिया को बताया कि नई यूडीएफ सरकार, अरनमुला विधायक अबिन वर्की कोडियट्टु और पाथनमथिट्टा सांसद एंटो एंथनी इस परियोजना के पक्ष में हैं, और कंपनी दोबारा सर्वे करने की योजना बना रही है। यह दावा विभाग के भीतर संभावित अनधिकृत सहयोग के प्रश्न उठाता है, जिससे जांच को और गंभीरता दी गई है।

प्रशासनिक और कानूनी प्रतिक्रिया

विभाग ने तुरंत तहसीलदार और ग्राम अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट का अनुरोध किया है, और इसपर आधिकारिक जांच आरंभ की गई है। यदि रिपोर्ट में कोई अनधिकृत कार्य उजागर होता है, तो इसे केरल हाई कोर्ट में 16 जुलाई को सुनाए जाने वाले अधिशेष भूमि मामले में पेश किया जाएगा। साथ ही, अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भविष्य में इस स्थल पर कोई अतिरिक्त ड्रोन सर्वे अनुमति नहीं दी जाएगी।

भविष्य के प्रभाव

यह जांच न केवल केरल सरकार की पारदर्शिता की परीक्षा लेगी, बल्कि सार्वजनिक भूमि के उपयोग, बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट और ड्रोन तकनीक के नियमन पर नई चर्चा को भी जन्म देगी। यदि हाई कोर्ट में इस मामले का उलटफेर हुआ, तो राज्य में भविष्य के बुनियादी ढाँचा प्रस्तावों की रीढ़ बदल सकती है, और निजी कंपनियों की जमीन सर्वेक्षण की सीमाओं को पुनः परिभाषित किया जा सकता है।