सी‑वोटर द्वारा किए गए सर्वे में दिखा कि 53% NDA समर्थक E20 पेट्रोल को नहीं अपनाना चाहते। माइलेज घटने, इंजन को नुकसान और पुराने वाहनों पर असर की चिंता प्रमुख कारण बताई गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 52.5% NDA समर्थकों ने E20 पेट्रोल को अस्वीकार किया
- माइलेज घटने और इंजन सुरक्षा मुख्य चिंताएँ हैं
- भविष्य में दो‑विकल्प (सामान्य और एथेनॉल‑मिक्स) की मांग बढ़ रही है
भारत सरकार ने 20% एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को घटाना, प्रदूषण कम करना और गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाना है। हालांकि, नई दिल्ली में आयोजित सी‑वोटर सर्वे ने इस नीति के प्रति व्यापक असंतोष को उजागर किया, विशेषकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के समर्थकों में।
सर्वे के प्रमुख आंकड़े
सर्वे के अनुसार, 52.5% NDA समर्थकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का उपयोग नहीं करेंगे, जबकि केवल 18.1% ने समर्थन जताया। विरोध का स्तर विपक्षी दलों के समर्थकों में भी समान रूप से उच्च था, जहाँ 57.9% ने E20 को अस्वीकार किया। कुल मिलाकर 55.1% उत्तरदाताओं ने E20 पेट्रोल को न अपनाने की इच्छा व्यक्त की।
मुख्य चिंताएँ: माइलेज और इंजन
जिन कारणों से जनता E20 से बच रही है, उनमें सबसे प्रमुख है माइलेज में संभावित गिरावट। 52.8% उत्तरदाताओं का मानना है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज घटेगी, और यह भावना NDA एवं विपक्षी समर्थकों दोनों में समान रूप से पाई गई। इसके अतिरिक्त, 54.2% ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को इंजन को नुकसान पहुंचाने वाला बताया, विशेषकर पुरानी कारों में।
पुराने वाहनों के मालिकों की विशेष चिंता
सर्वे ने यह भी उजागर किया कि 56.3% लोग मानते हैं कि E20 को अनिवार्य बनाना पुराने वाहन मालिकों के प्रति अन्याय होगा। यह भावना NDA समर्थकों में 49.2% और विपक्षी समर्थकों में 65.8% तक पहुँचती है, जिससे नीति के सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठते हैं।
विकल्प और मूल्य संरचना पर जनमत
भले ही E20 के खिलाफ विरोध तेज़ है, 75.9% उत्तरदाताओं ने दो‑विकल्पीय बाजार की माँग की – एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और शुद्ध पेट्रोल दोनों उपलब्ध रहें। इसके अलावा, 74.5% ने कहा कि यदि E20 पेट्रोल बेचा जाए तो उसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए। किंतु केवल 40.8% ने कम कीमत के आधार पर उपयोग करने की इच्छा जताई, जिससे कीमत घटाने से भरोसा पूरी तरह नहीं जीत पाता।
नीति के भविष्य की दिशा
सरकार के दावे के बावजूद, 37.2% ने पूरी तरह सहमति व्यक्त की कि E20 आयात को घटाएगा, जबकि 17.1% ने इस बात से पूरी तरह असहमत रहे। इस विभाजन को देखते हुए, नीति निर्माताओं को सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने हेतु विस्तृत परीक्षण, पारदर्शी डेटा और उपभोक्ता‑मित्र विकल्पों की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।